बाराबंकी। सरयू नदी का जल स्तर खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। इससे तटवर्ती 30 से ज्यादा गांव क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। 20 गांवों में खेती और आबादी क्षेत्र दोनों ही पानी भरने लगा है। कटान के कारण खेतिहर जमीन भी नदी में समाती जा रही है। शासनिक अधिकारी बाढ़ क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इस बीच बुधवार को नेपाल के बैराज से सरयू में फिर करीब साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि जल स्तर बुधवार की शाम को खतरे के निशान 106.070 मीटर से बढ़कर 106.520 मीटर तक पहुंचकर स्थिर रहा। बृहस्पतिवार तक इसके बढ़ने के आसार है।
राम सनेहीघाट तहसील के कोटेदार पुरवा, गोड़ियनपुरवा, पाठक पुरवा, लोनियनपुरवा, मास्टर पुरवा, कंगणन पुरवा, सहाई पुरवा मजरे ढेमा, छपटन पुरवा मजरे टिकरी, मुखियनपुरवा मजरे जलालपुर तराई की आबादी व खेती दोनों बाढ़ प्रभावित है। इसी तरह रामनगर तहसील खेत्र के सुंदरनगर, कोड़री,ललपुरवा मजरे बतनेरा, मदरहा, सांई तकिया, कोयलीपुरवा, सकतापुर, गड़रियनपुरवा मजरे डिहुवा, बाबा पुरवा, केदारीपुर मजरे सरसंडा व प्रसादीपुरवा मजरे सिसौंडा की आबादी और खेती दोनों प्रभावित है। लोग गांवों में रहकर नाव से आवागमन कर रहे हैं।
स्कूल व अस्पताल में फिर भरा पानी
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद टेपरा गांव में भी पानी भर गया है। वहीं प्राथमिक विद्यालय तेलवारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरहा में भी पानी भर गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य कर्मी तटबंध पर बैठे दिखे लोगों को दवाएं देते दिखे। सनावा, टेपरा, भयकपुरवा, बघौलीपुरवा, तेलवारी, गोबरहा, सरायसुर्जन, सिरौलीगुंग, कहरान पुरवा, कोठीडीहा, परसा, भैरवकोल, सरदहा, बीहड़, कुड़वा, परसवाल, रायपुर, मंझा व बेहटा गांव टापू बन गए हैं। आवागमन के रास्तों पर पानी भरने से नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। तहसीलदार सिरौलीगौसपुर बालेंदु भूषण वर्मा व नायब तहसीलदार दिनेश पांडेय ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांवों का भ्रमण किया।
सिरौलीगौसपुर एसडीएम प्रीति सिंह ने बताया की बाढ़ चौकी शुरू कर दी गई है। वही बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लेखपालों की की ड्यूटी बाढ़ क्षेत्र में लगा दी गई है। सभी गांवों में बृहस्पतिवार सुबह तक नाव लगवा दी जाएगी। गांवों में पानी भरने से सुंदरनगर तटबंध पर करीब 30 परिवार पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि गांवों में पानी घटने के बाद वापस जाएंगे।