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घरों तक पहुंचा सरयू नदी का पानी

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कोटवाधाम/गनेशपुर (बाराबंकी)। नेपाल द्वारा बार-बार पानी छोड़े जाने से सरयू उफान मारने लगी है। नदी का पानी खेतों से होते हुए घरों तक पहुंच गया है। नदी का रौद्र रूप देखकर लोग गांवों से पलायन करने लगे हैं। इसके साथ ही कई स्थानों पर कटान और तेज हो गई है।
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नदी का पानी जिस रफ्तार से बढ़ रहा है वह खतरे के निशान को किसी भी समय पार कर सकता है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और संबंधित तहसीलों के एसडीएम को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार नेपाल द्वारा रविवार को करीब तीन लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़े जाने के बाद नदी का पानी तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। नदी एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है जो किसी भी समय लाल निशान को पार कर सकती है। नदी का पानी खतरे के निशान से महज 14 सेंटीमीटर दूर है।
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नदी के तेवर देखकर तराई में हड़कंप मच गया है और लोग सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करने लगे हैं। पानी तेजी से खेतों से होते हुए गांवों की ओर पहुंचने लगा है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो किसी भी समय नदी का पानी गांवों के अंदर तक पहुंच जाएगा।
इससे तराई के लोग सहमे हुए हैं क्योंकि नदी का पानी कई स्थानों का कटान करने लगा है जिसकी वजह से अभी तक करीब 30 बीघे खेती योग्य भूमि नदी की धारा में समा चुकी है। तराई के लोगों में दहशत का माहौल है।
गनेशपुर क्षेत्र में तपेसिपाह, कोरियनपुरवा तथा मल्लाहन पुरवा के पास कटान तेज हो गई है। पानी का बहाव इतना ज्यादा है कि कटान को रोक पाना आसान नहीं है। हालांकि बाढ़ खंड के अभियंता पीए सिद्दीकी कटान रोकने के लिए पूरी टीम के साथ लगे हैं लेकिन वह सफल नहीं हो पा रहे हैं।
इसी प्रकार सिरौलीगौसपुर में गोबरहा, कहारनपुरवा, इटहुआपूर्व व माझा आदि के पास कटान काफी तेज हो गई है। कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा किए जा रहे इंतजाम नाकाफी दिखाई दे रहे हैं।
गोबरहा, कहारनपुरवा, इटहुवापूर्व के करीब दस से ज्यादा परिवार गांवों में पानी पहुंचने की आशंका को देखते हुए पलायन करने लगे हैं। गांव की मुन्नी देवी, लाहुरका, अगनु, आशीष द्विवेदी व राजन आदि ने कहा कि जिस तेजी से नदी का पानी गांवों की और बढ़ रहा है ऐसे में लगता है कि इस बार घर भी नहीं बचेंगे और नदी किसी भी समय उन्हें अपने आगोश में ले सकती है।
तराई के लोगों का कहना है कि कटान रोकने का कार्य भारी भरकम बजट के साथ कराया गया था जो अब बेमतलब साबित हो रहा है। न तो कहीं पर कटान रुकी है और न ही इससे यहां के ग्रामीणों को कोई लाभ ही मिल पा रहा है।
नदी लगातार गोबरहा, कहारनपुरवा, हाता, पंसारा गांव की तरफ बढ़ रही है। इससे यहां पर बाढ़ खंड द्वारा कराया गया कार्य बेकार हो गया है। नदी लगातार खाली पड़ी जमीन व खेत काट कर गांव की तरफ बढ़ रही है।
प्रशासन का दावा है कि बाढ़ से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाढ़ की चपेट में आने वाले क्षेत्रों में 10 बाढ़ चौकियां संचालित कर दी गई हैं और इन पर राजस्व कर्मियों की तैनाती करते हुए पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है।
18 स्थानों पर राहत शिविर बनाए गए हैं, 68 गोताखोर लगाए गए हैं, 14 बड़ी और 277 मंझोली नावें तथा 291 नाविकों को बाढ़ क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा खाद्यान्न का टेंडर हो चुका है फाइनेंशियल बिड खुल चुकी है जिसका परीक्षण चल रहा है चारे का टेंडर प्रक्रिया में है।
सिरौलीगौसपुर के एसडीएम सुरेंद्र पाल विश्वकर्मा ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही तराई में तैनात किए गए राजस्व कर्मियों को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है। नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है। जहां पर कटाना हो रही है उसे रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों को कहा गया है।
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