बाराबंकी। सफेदाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास मिले 18 वर्षीय सैफ का शव 40 दिन बाद शुक्रवार को कब्र से निकाला गया। परिजनों का आरोप है कि हाथ पर नाम होने के बावजूद पुलिस की लापरवाही से उसे लावारिस मानकर दफना दिया गया। हालांकि इस मामले में लखनऊ पुलिस ने आरोपियों को पहले ही जेल भेज चुकी है।
लखनऊ के सआदतगंज से 14 जून को लापता सैफ का शव 15 जून को नगर कोतवाली में मोहम्मदपुर चौकी के समीप मिला था। परिजनों ने 17 जून को गुमशुदगी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने 19 जून को शव सोता कब्रिस्तान में दफना दिया। बाद में पिता आसिफ ने पहचान किए जाने पर हत्या का केस दर्ज हुआ और नामजद आरोपी जेल भेजे गए।
डीएम ईशान प्रताप सिंह के आदेश पर नायब तहसीलदार और पुलिस की मौजूदगी में शुक्रवार को शव कब्र से निकालकर लखनऊ भेजा गया। नगर कोतवाली के एसएचओ सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में लखनऊ पुलिस आरोपियों को जेल भेज चुकी है।