सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचकर किसान पछता रहे हैं। किसानों के साढे़ चार करोड़ रुपये खरीद में लगी एजेंसियों ने फंसा दिए हैं। ऐसा पहली बार हुआ जब विपणन विभाग भी किसानों को भुगतान नहीं कर पा रहा है। किसान भुगतान पाने के लिए विभागों के चक्कर काट रहे हैं और अधिकारी बजट न होने की बात कहकर हाथ खडे़ कर रहे हैं।
धान खरीद के लिए जिले भर विपणन विभाग, पीसीएफ, यूपी एग्रो, यूपीएसएस, एनसीसीएफ, उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम, नैकॉफ और पंजीकृत सोसायटियों ने धान खरीद केंद्र खोले थे। इसके अलावा भारतीय खाद्य निगम ने भी खरीद केंद्र खोले थे। सभी एजेंसियों ने मिलकर 1 लाख 15 एमटी धान खरीद डाला जो निर्धारित लक्ष्य 78 हजार एमटी से 36 हजार ज्यादा है। इस प्रकार जिले के किसानों से करीब 58 करोड़ 79 लाख रुपये का धान खरीदा गया और भुगतान 54 करोड़ 17 लाख रुपये का ही किया गया। करीब 4 करोड 62 लाख रुपये का भुगतान किसानों को अभी तक नहीं किया जा सका है जबकि धान की खरीद रविवार 28 फरवरी से बंद हो गई है। इनमें से सबसे ज्यादा करीब 2 करोड़ 84 लाख रुपया किसानों का विपणन शाखा ने फंसा दिया है।
खरीद में ऐसा पहली बार हुआ जब विपणन शाखा किसानों को खरीदे गए धान का भुगतान नहीं कर पा रही है। वहीं पीसीएफ ने 1 करोड़ 52 लाख रुपया, यूपी एग्रो 16 लाख रुपया और नैकॉफ ने 9 लाख रुपया किसानों का फंसा दिया है जिसका भुगतान नहीं हो पा रहा है क्योंकि इनके पास बजट ही नहीं है और न ही सरकार ने अभी तक इस मद में पैसा दिया है। बकाया धन कब तक मिलेगा इसकी उम्मीद दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। क्योंकि बकाया पैसा पाने के लिए एजेंसियों ने कई पत्र शासन को लिखे हैं जिससे कि किसानों को उनका भुगतान किया जा सके लेकिन अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला है।