गंगा, गोमती और इनकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए एक ओर अभियान चलाया जा रहा है तो दूसरी ओर रेठ नदी में गंदगी का विष घोला जा रहा है।
कुर्सी थाना क्षेत्र में ग्राम मीर नगर बनौगा के पास एक स्लाटर हाउस से मवेशियों का खून व अवशेष रेठ नदी में बहाया जा रहा है। नदी को कई अन्य जगह पर गंदा किया जा रहा है। इससे नदी में मछलियां मर गई हैं। इन सबके बावजूद प्रशासन द्वारा रेठ नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
हाल ही में जिले की एक संस्था द्वारा गोमती और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए यात्रा निकाली गई। इसके बाद भी रेठ नहीं को स्वच्छ बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। अमरून फैक्ट्री (स्लाटर हाउस) में कटने वाले मवेशियों का खून व उनका अवशेष मीर नगर बनौगा के पास रेठ नदी में बहाया जा रहा है। जिससे यहां का पानी काला हो गया है। इससे नदी में मछलियां मर गईं हैं।
मवेशी तक नदी का पानी नहीं पीते। ग्राम मीरनगर निवासी रामचंदर बताते हैं कि नदी में फैक्ट्री द्वारा छोड़ी जा रही गंदगी के चलते उठने वाली दुर्गंध से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुहाल है। लोगों का कहना है बदबू से लोगों को खानपान व सोना तक दुश्वार है। यहीं के सुरेश कुमार कहते हैं पहले नदी में मछलियां थीं लेकिन जब से इसमें फैक्ट्री की गंदगी छोड़ी जा रही है, तब से मछलियां ही नहीं बची हैं।
अब तो लोग नदी के किनारे तक नहीं जाते हैं। यहीं के बालकराम, राजेश कुमार व संजय कहते हैं कि पहले लोग नदी के किनारे मवेशी चराने जाते थे लेकिन नदी का पानी दूषित होने के चलते लोग मवेशी को उधर जाने ही नहीं देते। क्षेत्र में संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी बराबर बनी रहती है।
ग्राम उमरा के पास सोना गोल्ड फैक्ट्री (मुर्गी दाना बनाती है) का गंदा पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है। जिससे यहां का पानी भी प्रदूषित है। आसपास के गांव के लोग यहां उठने वाली बदबू से परेशान हैं। लोगों ने कई बार मामले की शिकायत प्रशासन से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।