बाराबंकी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण का इंतजार मंगलवार को अधिकृत सूची जारी होने के बाद समाप्त हो गया। वहीं आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद बजे चुनावी विगुल का शोर गांवों में सुनाई देने लगा है। बदले समीकरण के अनुरूप गांवों के रणनीतिकार चुनावी बिसात को बिछाने में लग गए हैं। एक ही परिवार व वर्ग तक सीमित प्रधानी लंबे समय बाद आरक्षण में फिसले तो किसी करीबी को प्रधान बनाने की कसरतें भी की जा रही हैं।
पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से चुनावी भूमि तैयार करने वाले आरक्षण को लेकर चुप्पी साधे हुए थे। बस आरक्षण आने की घड़ी का इंतजार था। कई पुराने खिलाड़ी तो मन मुताबिक आरक्षण को लेकर सेंधमारी भी लगे थे। ऐसे में हर पल बस आरक्षण जानने की जिज्ञासा हर किसी में भी। पंचायती राज विभाग से जुड़े लोगों से उनके द्वारा बराबर संपर्क किया जाता रहा। वहीं अगर सोशल मीडिया पर कोई आरक्षण से जुड़ी सूचना व फेक सूची भी किसी ने डाल दी।
तो वह मिनटों में मोबाइलों पर घूमने लगती थी। कई दिनों से चल रही कसरत के बाद मंगलवार को सुबह जारी होने वाली आरक्षण सूची बनीकोडर व फतेहपुर ब्लॉक के आरक्षण में खामियों को लेकर दोपहर तीन बजे के बाद जारी हो सकी। सबसे पहले जिला पंचायत के सदस्य व प्रमुख पद के आरक्षण की सूची जारी की गई। इसके बाद प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के दावेदारों की धड़कने बढ़ गईं।
हालांकि चार बजे तक प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के आरक्षण की सूची भी जारी कर दी गई। ब्लॉकों पर सूची चस्पा हुई तो उसमें आरक्षण की स्थिति जानने को लेकर सुबह से इंतजार कर रहे लोगों की भीड़ लग गई। कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर आरक्षण की सूची वायरल हुई। तब जाकर लोगों को राहत मिली। मगर, सूची देखने के बाद कई के सपने बिखर गए। तो कई लोगों के सिर प्रधान बनने का सेहरा बंधते दिखने लगा है।
ठसक कायम रखने को बटाईदार व नौकरों पर दांव
बाराबंकी। गांव की प्रधानी की विरासत आरक्षण से छीनी तो ठसक कायम रखने के अब नौकरों व बटाईदारों पर दावों लगाने की कवायद शुरू हो गई। हालांकि इस खेल में जीत हार का फैसला तो समय तय करेगा। मगर, अपनी चुनावी जमीन तैयार करने वाले किसी भी सूरत में मौके को हाथ से जाने नही देना चाहते हैं। मंगलवार को प्रधान पद के आरक्षण के बाद गांवों में चुनावी हलचल तेज हो गई है।
लंबे समय जिन घरों व वर्गों में प्रधानी चली आ रही थी। आरक्षण में वह दूर होती जा रही है। ऐसे में लंबे समय से चुनावी जमीन तैयार करने वाले किसी भी सूरत में अपनी पराजय स्वीकार नहीं करना चाहते है। अपनी ठसक कायम रहे इसके लिए बदले आरक्षण के अनुरूप अपने बटाईदार व नौकरों को चुनावी समर में उतारने की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि कई लोगों को बदले आरक्षण से चुनाव जीतने का रास्ता साफ दिखने लगा है।
आरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शिता के पूरी कर सूची जारी कर दी गई है। ब्लॉकों पर जहां सूची चस्पा की गई है। वहीं एनआईसी की साइट पर भी उपलब्ध है। इसके बाद अब पारदर्शिता के साथ चुनाव सम्पन्न कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
-डॉ. आदर्श सिंह जिलाधिकारी