बाराबंकी। तीन लाख रुपये से ज्यादा मूल्य का गेहूं और धान बेचने वाले एक हजार किसानों के राशनकार्ड निरस्त किए जाएंगे। शासन ने ऐसे किसानों की सूची जिला आपूर्ति कार्यालय को उपलब्ध करा दी है। सूची मिलने के बाद विभाग ने ऐसे किसानों के सत्यापन का कार्य शुरू कर दिया है। तहसीलों से जांच रिपोर्ट उपलब्ध होते ही इनके राशनकार्ड निरस्त कर दिए जाएंगे और इनके स्थानों पर नए पात्रों को इसमें शामिल किया जाएगा।
जिले के 1007 ऐसे किसानों को चिहिन्त किया गया है जिन्होंने तीन लाख रुपये से अधिक का धान और गेहूं जिले के सरकारी केंद्रों पर बेचा है। शासन को यह भी बताया गया कि अपात्र होने के बाद भी इन किसानों के राशनकार्ड बने हुए हैं और ये सरकार द्वारा चलाई जा रही मुफ्त अनाज वितरण योजना का लाभ उठा रहे हैं।
जबकि सैकड़ों की संख्या में पात्र राशनकार्ड न होने के कारण योजना का लाभ पाने से वंचित हैं और वह राशनकार्ड बनवाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे है। लेकिन विभाग लक्ष्य पूरा होने की बात कहकर नए राशनकार्ड बनाने से हाथ खड़े कर रहा है। इसके बाद शासन ने इन किसानों के आधारकार्ड से जब मिलान कराई तो मामला पकड़ में आया।
अब इसकी तहसीलवार सूची जिला आपूर्ति कार्यालय को उपलब्ध कराई गई है। शासन से सूची मिलने के बाद इसे तहसील में तैनात आपूर्ति निरीक्षकों को सत्यापन के लिए भेज भी दिया गया है जहां पर तैनात निरीक्षकों ने सत्यापन का कार्य भी शुरू कर दिया है।
किस तहसील में मिले कितने किसान
हैदरगढ़ तहसील में सबसे ज्यादा 329, सिरौलीगौसपुर तहसील में 305, रामसनेहीघाट तहसील में 123, नवाबगंज तहसील में 119, फतेहपुर तहसील में 86 और रामनगर तहसील में 45 किसान ऐसे मिले हैं जिन्होंने तीन लाख से अधिक मूल्य का धान और गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचा हैं। सूची मिलने के बाद इनके सत्यापन का कार्य शुरू हो गया है। सूत्र बताते हैं कि इसके साथ ही चार पहिया वाले और आयकर दाताओं को भी चिहिन्त किया जा रहा है और इनके भी राशनकार्ड निरस्त किए जा सकते हैं।
सरकारी क्रय केंद्रों पर तीन लाख रुपये से अधिक मूल्य का धान व गेहूं बेचने वाले 1007 किसानों की सूची शासन स्तर से उपलब्ध कराई गई है। सूची मिलने के बाद सभी आपूर्ति निरीक्षकों को तहसीलवार भेज इसका सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ऐसे किसानों के राशनकार्ड निरस्त कर दिए जाएंगे और पूरी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
-डॉ. राकेश कुमार तिवारी, डीएसओ