उन्होंने बताया कि नियमित रूप से मंदिर के कपाट सुबह साढ़े चार से पांच बजे के बीच खुलते थे। भोर की आरती के साथ विधिवत पूजा होती थी, लेकिन इस बार रात 12 से एक बजे ही कपाट खोल दिए गए। इससे हजारों श्रद्धालु एक साथ मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने लगे। उदय गिरी निहंग संप्रदाय से जुड़े हैं। मंदिर की सेवा में जुटे वह गिरी परिवार की सातवीं पीढ़ी हैं। बताया कि पूर्वजों के समय से लेकर आज तक कभी कोई हादसा नहीं हुआ था। कुछ स्थानीय लोगों का भी कहना है कि प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के नाम पर जलाभिषेक की शुरुआत रात से ही करवा दी, ताकि सुबह तक श्रद्धालुओं की संख्या कम हो सके। मगर यह रणनीति उलटी पड़ गई।