देवा। बाजार में खाने के लिए नया आलू आ गया है और बोआई के लिए बीज की मांग लगभग समाप्त हो चुकी है। ऐसे में शीतगृहों (कोल्ड स्टोरेज) में रखे किसानों के पुराने आलू के भाव गिरे हैं। पंद्रह दिन पहले जब आलू की बोआई शुरू हुई थी, तब दाम 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे, लेकिन अब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल में भी आलू के खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
देवा-फतेहपुर क्षेत्र को पोटैटो बेल्ट (आलू पट्टी) के रूप में जाना जाता है। यहां बड़े पैमाने पर आलू का उत्पादन होता है। लाल आलू (राजेंद्र वन) की मांग देश की हर प्रमुख आलू मंडी में होती है। इस बार पूरे जिले में करीब 25,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बोया गया और लगभग 70,000 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। जिसका 91 प्रतिशत भंडारण जिले के 80 शीतगृहों में किया गया। इसी हफ्ते आलू के भाव में गिरावट आई है। वर्तमान में 900 रुपये प्रति क्विंटल गीला आलू और 1000 रुपये प्रति क्विंटल बिल्टी (कोल्ड स्टोरेज रसीद) का भाव है।
आलू व्यापारी राशिद राईन ने बताया कि पंजाब प्रांत के उना, होशियारपुर, मोगा सहित कन्नौज के ठठिया क्षेत्र से नये आलू की फसल बाजार में आ रही है। इसलिए खाने के लिए लोग पुराने की अपेक्षा नये आलू को खरीद रहे हैं। बीज के लिए आलू की जरूरत लगभग समाप्त हो गई है। मगर अभी भी करीब 10 लाख क्विंटल (लगभग 20 लाख बोरी) आलू कोल्ड स्टोरेज में भंडारित है। आलू व्यापारी दीपक सिंह ने बताया कि उन्होंने अपना आलू नवंबर माह तक इसलिए रोक कर रखा था कि सहालग में आलू की मांग बढ़ेगी। लेकिन, पंजाब का नया आलू आने से यहां के पुराने आलू की मांग घट गई है। कोल्ड स्टोर संचालक नवंबर समाप्त होते ही स्टोरेज की मशीन बंद करके आलू बाहर निकाल देंगे। ऐसी स्थिति में किसानों और व्यापारियों को आलू औने-पौने भाव में बेचने की विवशता है।