बाराबंकी। केवल 300 मीटर की व्यास वाली जमीन ने देश व प्रदेश को पांच बार सांसद व आठ बार विधायक दिए। आप सोच रहे होंगे कि इतनी बार सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य देने वाली इस सरजमीं पर विकास कार्यों की फेहरिस्त लंबी होगी और इस इलाके का कायाकल्प हो गया होगा। मगर ऐसा नहीं है।
सड़कें बदहाल हैं। मूलभूत सुविधाएं हाशिए पर हैं। हम बात कर रहे हैं सिद्घौर ब्लॉक व हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले कस्बा नईसड़क की। नईसड़क का राजनीतिक इतिहास जानने के बाद अंजान लोग तो दंग रह जाते हैं। इस चुनाव में यहां के लोगों के मन में यह मुद्दा भी घर कर गया है।
वर्ष 1977 के बाद इस क्षेत्र ने जनप्रतिनिधि देने में झड़ी लगा दी। 1977 में नईसड़क चौराहे के बाद ही रहने वाले रामसागर रावत जनता पार्टी से विधायक बने। इसके बाद 1980 में रामसागर रावत फिर एमएलए चुने गए। 1985 में रामसागर रावत लोकदल से फिर विधायक बने। 1989 में रामसागर रावत सांसद चुने गए और चार बार सांसद व तीन बार विधायक के रूप में नईसड़क में ही रहकर राजनीति की।
चार बार सांसद व तीन बार विधायक बनने वाले रामसागर सपा के संस्थापक सदस्यों में एक हैं और अभी भी नईसड़क पर ही रहते हैं। अभी भी वे जिला पंचायत सदस्य हैं। इसी तरह नईसड़क पर ही रहकर राजनीति में आए बैजनाथ रावत 1991 में भाजपा से विधायक बने। क्रम टूटा नहीं और 1993 में बैजनाथ फिर एमएलए चुने गए।
इस दौरान वे प्रदेश के उप ऊर्जा मंत्री बनाए गए। बैजनाथ ने नईसड़क कस्बे के पास ही पेट्रोल पंप का संचालन प्रारंभ किया। 1998 में पहली बार जिले में भाजपा के सांसद भी बैजनाथ ही बने। इतना ही नहीं बीते विधानसभा चुनाव अर्थात 2017 में बैजनाथ रावत हैदरगढ़ से विधायक चुने गए।
नईसड़क के राजनीतिक प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार सांसद व विधायक रह चुके रामसागर रावत के पुत्र राममगन रावत जहां उपचुनाव में विधायक बने। वहीं दूसरी बार 2012 के चुनाव में भी सपा से ही हैदरगढ़ के विधायक चुने गए।
नईसड़क कस्बे में ही रहने वाले सतीश चंद्र शर्मा भी बीते चुनाव में भाजपा के दरियाबाद विधायक निर्वाचित हुए। साफ जाहिर है कि नई सड़क की सरजमीं अब तक पांच बार सांसद व आठ बार विधायक दे चुकी है। लेकिन जिस प्रकार से नईसड़क ने देश व प्रदेश को जनप्रतिनिधि दिए उस हिसाब से न तो कस्बे का विकास हुआ न क्षेत्र का। उदाहरण के तौर पर इतना जान लें कि नईसड़क कस्बे में मुख्य चौराहे पर लगी हाईमास्ट लाइट सालों से खराब है। आसपास के गांवों का कायाकल्प भी नहीं हो पाया।
अभी तक गोमती नदी के किनारे के गांवों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। सड़कें बदहाल हैं। हैदरगढ़ रोड पर स्थित नूरपुर चौराहे से मेहंदीपुर जाने वाली सड़क बदहाल है। ग्राम गढ़ी से दुनौली जाने वाली रोड बह गई है। आधा दर्जन गांवों में चार पहिया वाहन महीनों से नहीं जा रहा है। विकास के मामले में नईसड़क व आसपास का इलाका अभी भी राह ताक रहा है। लोग चुटकी लेते हैं कि जब नईसड़क के आसपास यह हाल है तो आगे कौन कहे। (संवाद)