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समीकरण साध विरासत बचाने में फिर कामयाब हुए दिग्गज

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बाराबंकी। ब्लॉक की राजनीति से सफर शुरू कर प्रदेश तक की राजनीति में जगह बनाने वाले दिग्गजों का ब्लॉक प्रमुखी के चुुनाव में भी दबदबा कायम रहा। विपरीत हवाओं व बदले निजाम में भी सधे हुए समीकरण के साथ दिग्गज एक बार फिर अपनी विरासत बचाने में कामयाब दिखे। किसी ने स्वयं तो किसी ने पत्नी व बेटे को चुनाव मैदान में उतार ब्लॉक प्रमुखी की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाया।
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जिले में दो दशक से अधिक समय से दरियाबाद ब्लॉक प्रमुख का चुनाव सुर्खियों में रहा है। इस ब्लॉक की राजनीति में भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व पूर्व ब्लॉक प्रमुख विवेकानंद पाण्डेय (विवेक पाण्डे) का वर्ष 1995 से दखल बना है। विवेक 1995 से 2005 तक दो बार लगातार प्रमुख रहे। आरक्षण बदला तो वर्ष 2005 में अपने समर्थन से पराना देवी को प्रमुख बनाया।
हालांकि 2010 में बहुत कम वोट से सपा की रुचि सिंह से चुनाव हारे। साल 2015 में सपा के चमन सिंह ने सत्ताधारी दल का फायदा उठाकर जीत हासिल की। मगर, वह एक साल के प्रमुख रहे। क्योंकि निजाम बदलते ही विवेकानंद ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर अपने अनुज देवानंद पाण्डेय को प्रमुख बनाया। एक बार फिर इस कुर्सी पर अपने बेटे आकाश पाण्डेय को बैठाकर अपनी विरासत बचाने में कामयाब हुए।
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वहीं बनीकोडर ब्लॉक के प्रमुख पद पर वर्ष 2000 में उर्मिला वर्मा पहली बार प्रमुख बनीं। वर्ष 2005 में आरक्षण बदला तो उनके पति चंद्रशेखर वर्मा ज्येष्ठ प्रमुुख बने। 2010 में चंद्रशेखर ने निर्विरोध चुनाव जीता तो 2015 के चुनाव में बहू रुचि वर्मा प्रमुख बनीं। इस बार फिर उर्मिला वर्मा ने प्रमुख बन अपनी विरासत बचाने में कामयाब हुईं।
बंकी ब्लॉक से सदर विधायक सुरेश यादव की पत्नी आशा यादव वर्ष 2005 व 2010 में निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख बनीं। साल 2015 में आरक्षण बदला तो उनके समर्थन से माया देवी निर्विरोध चुनाव जीतीं। उसके बाद इस बार के चुनाव में भी आशा यादव ने निर्विरोध चुनाव जीत अपना दबदबा कायम रखा। जबकि पूरे डलई में पूर्व प्रमुख दृगपाल सिंह की पत्नी दो बार प्रमुख रहीं तो एक बार स्वयं प्रमुख रहे।
एक बार ड्राइवर को ब्लॉक प्रमुख बनाया। इस बार बेटा रत्नेश सिंह मिंटू निर्विरोध चुनाव जीत विरासत को बचाने में कामयाब हुआ। रामनगर में संजय तिवारी ने दूसरी बार ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा जमाया तो फतेहपुर ब्लॉक में अनिल वर्मा लगातार दूसरी बार प्रमुख की कुर्सी हथियाने में कामयाब हुए।
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