बाराबंकी। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने वैदिक पेंट प्लांट लगाने की पहल की है। खास बात कि बाराबंकी समेत प्रदेश के चार जिलों में यह प्लांट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाए जाएंगे। हालांकि विधानसभा चुनावों के बाद ही इस पर काम होगा। चुनाव बाद भूमि की तलाश की जाएगी और स्टीमेट तैयार किया जाएगा। इसे लेकर शासन से मंजूरी मिल गई है। अगले वित्तीय वर्ष में इस प्लांट के धरातल पर आने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, अभी तक जयपुर राजस्थान के सांगनेर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो तरह के उत्पाद जिसमें डिस्टेंपर व व्हाइट पेंट शामिल है, का उत्पाद शुरू हुआ था। वहां पर लगे प्लांट की सफलता के बाद उसी से मिले फीडबैक से यह निर्णय लिया गया कि यूपी में इसका उत्पादन किया जाए। इसे लेकर बाराबंकी के साथ ही वाराणसी, बलिया व मेरठ में वैदिक पेंट प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई है।
इस प्लांट को कहां और कब लगाया जाएगा इस पर विचार विमर्श चल रहा है। सबसे पहले भूमि का चयन किया जाएगा। ऐसे प्लांट कम से कम 40 लाख रुपये खर्चा आएगा। एक बार संयंत्र चलने लगेगा तो इसका विस्तार किया जाएगा। फिर जितना विस्तार होगा लागत उतनी ही अधिक बढ़ेगी। प्लांट की स्थापना में उन लोगों को रोजगार मिलेगा जो इस काम के लिए प्रशिक्षित हैं।
नैसर्गिक होगा पेंट, प्रयोग होगा गोबर
वैदिक पेंट व कलर पूरी तरह से प्राकृतिक होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत होती है कि किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग इसमें नहीं होता है। इसलिए इसे पूरी तरह से नैसर्गिक पेंट माना जाता है। टिकाऊ होने के साथ ही बाजार में बिक रहे केमिकल वाले पेंट से इसकी कीमत भी कम होती है। अब इसका चलन भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं वैदिक पेंट बनाने में गाय के गोबर का भी प्रयोग होगा।
बाराबंकी में भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत आर्गेनिक वैदिक पेंट बनाने का संयंत्र लगाया जाएगा। हम चार जिलों में ऐसे संयंत्र लगाएंगे। इससे रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही गाय के गोबर का इस्तेमाल भी पेंट बनाने में होने से पशुपालकों को गोबर की कीमत मिल जाएगी।
-डीएस भाटी, निदेशक, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग