बाराबंकी। अब सरकारी स्कूलों में मास्टर साहब पढ़ाई कैसी करा रहे हैं और बच्चों की थाली में दोपहर के भोजन का स्वाद कैसा है, इसका फैसला सीधे गांव के लोग करेंगे। इसकी निगरानी के लिए जिले के परिषदीय और राजकीय विद्यालयों में विद्यालय प्रबंध समिति के गठन की हलचल तेज हो गई है। आगामी एक दिसंबर से स्कूल की व्यवस्था सुधारने और विकास कार्यों की कमान नई टीम के हाथों में होगी।
पारदर्शी तरीके से एक नवंबर से गठित होने वाली 15 सदस्यीय समिति में अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम रहेगी। इसमें 11 अभिभावक सदस्य चुने जाएंगे, जिनमें 50 फीसदी महिलाओं की भागीदारी और हर कक्षा का प्रतिनिधित्व अनिवार्य रहेगा। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी इन्हीं अभिभावकों में से चुने जाएंगे, जिसमें एक पद पर महिला का होना जरूरी है। बाकी चार सदस्यों में स्थानीय जन प्रतिनिधि, एएनएम, लेखपाल और सदस्य सचिव के रूप में प्रधानाध्यापक शामिल होंगे। बीएसए नवीन कुमार पाठक ने बताया कि नई समिति का चयन एक नवंबर से खुली बैठक में सर्वसम्मति से होगा। विवाद की दशा में गोपनीय मतदान कराया जाएगा। नवगठित समिति बच्चों के नामांकन, शिक्षकों की उपस्थिति और एमडीएम की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।