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कोरोना से सिर्फ आक्सीजन कंसट्रेटरों से जंग लड़ने की तैयारी

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बाराबंकी। कोरोना जैसी महामारी से जंग जीतने की तैयारी सिर्फ कागजों पर ही चल रही है। देखा जाए तो कोरोना में प्रयोग की जाने वाली दवाएं तक अस्पतालों में नहीं है। संक्रमितों को सिर्फ किट देकर काम चलाया जा रहा है। यहीं नहीं तीन अस्पतालों में से एक भी अस्पताल में अभी तक ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाया जा सका है। विभाग सिर्फ ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों के माध्यम से कोरोना से लड़ने की तैयारी में लगा हुआ है। इसके अलावा डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक का संकट बना हुआ है।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन का संकट सबसे ज्यादा देखने को मिला। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो दूसरी लहर की चपेट में आकर 89 लोगों की मौत हुई है जबकि हकीकत इससे इतर है और कोरोना से सौ से अधिक लोगों की जान गई। इनमें से ज्यादातर की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी न रहे इसके लिए तैयारियां जोरों पर शुरू की गईं लेकिन अभी तक सिर्फ और सिर्फ विभाग ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों तक ही सीमित है।
चयनित तीन अस्पतालों में से किसी में भी अभी तक ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाया जा सका है। सीएचसी पर दवाओं के नाम पर सिर्फ संक्रमितों को किट देकर काम चलाया जा रहा है। इतना जरूर है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन के प्लांट तो नहीं लग सके लेकिन कंसंट्रेटर लगाकर आगे की तैयारियां जरूर तेज कर दी गई हैं। देखा जाए तो प्राथमिक उपचार के लिए जिले की 15 सीएचसी पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जरूर उपलब्ध करा दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अन्य तैयारियां भी की जा रही हैं जो बहुत जल्द पूरी हो जाएंगी।
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यहां पर लगने हैं ऑक्सीजन प्लांट
कोरोना को देखते हुए जिला पुरुष अस्पताल, संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर, सीएचसी सिद्धौर में पहले चरण में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने की तैयारी शुरू की गई। लेकिन ये तैयारियां अभी कागजों पर ही चल रही हैं किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने की तैयारी पूरी नहीं की जा सकी है। कागजी प्रक्रिया इसमें जहां रोड़ा बनी हुई है वहीं शासन स्तर से भी अभी कुछ फाइनल निर्देश नहीं मिल सके हैं। ऐसे में दूसरी लहर तो निपट गई लेकिन जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं उससे साफ है कि हम तीसरी लहर से निपटने के लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।
237 में सिर्फ 197 डॉक्टरों की है तैनाती
कोरोना काल में सीएचसी-पीएचसी पर तैनात ज्यादातर डॉक्टर गायब हैं। देखा जाए तो 237 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 197 की ही तैनाती है। इनमें भी 13 डॉक्टर पीजी करने गए हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि कई चिकित्सक बीमार हैं तो कुछ कोरोना के खौफ की वजह से आते ही नहीं है। यहीं हाल पैरामेडिकल स्टाफ का भी है। तैनाती होने के बाद भी ज्यादातर कर्मी अस्पतालों से गायब ही रहते हैं।
और भेजे गए 15 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
ज्यादातर सीएचसी पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध करा दिए जाने के बाद शुक्रवार को संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर को पांच, सीएचसी दरियाबाद को दो, सतरिख को दो, त्रिवेदीगंज को दो, देवा को दो, सूरतगंज को दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिए गए हैं। कॉर्पोरेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए दस जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर भी अस्पतालों को भेजने की तैयारी चल रही है।
जिला पुरुष अस्पताल, संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर और सिद्धौर में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसको लेकर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिए गए हैं। शासन से जो निर्देश मिलेंगे उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोरोना से निपटने के लिए हमारी तैयारियां जोरों पर हैं। विभाग की ओर से हर स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
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-डॉ. बीकेएस चौहान, सीएमओ
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