बाराबंकी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जिले के असल किसान तीन साल बाद भी महरूम है। जबकि बिना खेती व नौकरीपेशा वाले लोगों के पूरे परिवार को सम्मान निधि की आठवीं किस्त का भी लाभ मिल गया। इससे जिम्मेदार अफसर भी वाकिफ हैं। मगर, किसानों के डाटा संशोधन की बाध्यताएं व मुख्यालय स्तर पर पेंडिंग भेजी गई शिकायतों का निस्तारण न होने से सम्मान निधि की यह गड़बड़ी दूर होने की बजाय विभाग के लिए नासूर बनती जा रही है।
जिले में पांच लाख 83 हजार 110 पंजीकृत किसान है। इसमें पांच लाख 10 हजार 205 किसानों को पात्र किया गया। जबकि इसमें शिकायत मिलने के बाद लाभ ले रहे 49 हजार 622 ऐसे किसान जो भूमिहीन, आयकर फाइलिंग व पति-पत्नी तथा मृतक किसान पाए गए। जिनकी विभाग ने सम्मान निधि पर रोक लगा दी। बावजूद इसके आठवीं किस्त का लाभ पाने वाले चार लाख 6 हजार 583 किसानों में भी अधिकांश अपात्र सम्मान निधि की आठवीं किस्त तक का लाभ पा गए।
जबकि पात्र हजारों किसान तीन साल से सम्मान निधि को लेकर विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। क्योंकि इसमें जहां अधिकांश किसानों को अपात्र तो सैकड़ों की दूसरों के खाते में सम्मान निधि भेजी जा रही है। विभाग आने पर किसानों से आधार, खतौनी व बैंक पासबुक की फोटोकॉपी लेकर संशोधन का आश्वासन तो दिया जाता है। मगर, विभाग से लेकर दो बार फरवरी व मार्च 2021 में लगे तीन दिवसीय किसान सम्मान समाधान मेले में प्रपत्र प्रस्तुत करने वाले किसानों को अभी तक लाभ नहीं मिल सका।
विभागीय सूत्रों की मानें तो इसके पीछे जहां अभी अधिकांश डाटा कृषि विभाग में रखा फीडिंग की बाट जोह रहा है तो वहीं करीब सवा सौ किसानों की शिकायतों के निस्तारण का भेजा गया डाटा प्रदेश मुख्यालय पर लंबित है। बताते हैं कि मुख्यालय पर सभी 75 जिलों की शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी दो कर्मचारियों पर है। ऐसे में मैन पावर की कमी के कारण विलंब हो रहा है। डाटा संशोधन का अधिकार अगर जिला मुख्यालयों को मिले तो किसानों की शिकायतों का निस्तारण आसानी से किया जा सकता है।
कर्मचारियों से मांगी जांच रिपोर्ट
हाल में ही कृषि विभाग में नौकरीपेशा व बनीकोडर ब्लॉक में बिना भूमि वाले लोगों के पूरे परिवार को किसान सम्मान निधि का लाभ मिलने की शिकायतें आईं। जिस पर विभाग ने स्थानीय कर्मचारियों से इसकी जांच रिपोर्ट मांगी है। वहीं दतौली निवासी मंशाराम व कुंती तथा रामनगर निवासी पुष्पा, बृजेश, दुर्गेश जैसे बहुतेरे किसान तीन साल से विभाग के चक्कर काट रहे हैं मगर, उन्हें सम्मान निधि की एक भी किस्त नसीब नहीं हो सकी।
डेढ़ सौ अपात्रों से की गई रिकवरी
किसान सम्मान निधि का लाभ पा रहे अपात्रों की शिकायत मिलने पर विभाग ने नोटिस जारी किया। इसके बाद करीब डेढ़ सौ अपात्रों से सवा आठ लाख रुपये की रिकवरी विभाग ने की। मगर, उसके बाद रिकवरी का पोर्टल बंद हो गया। ऐसे में अभी अधिकांश अपात्रों से सम्मान निधि की रिकवरी का काम अटका पड़ा है।
यह बात सही है कि अधिकांश पात्र किसानों को अभी सम्मान निधि नहीं मिल रही तो अभी तमाम अपात्र इसका लाभ पा रहे हैं। पात्र किसानों का डाटा प्रदेश मुख्यालय भेजा गया है। मगर, वहां पर मैनपावर की कमी होने के कारण संशोधन कर केंद्र को नहीं भेजा जा रहा। ऐसे में पात्र किसानों को सम्मान निधि मिलने में दिक्कत आ रही है। वहीं अपात्र किसान की सूचना मिलते ही सम्मान निधि रोकने के बाद जांच के बाद नोटिस भेजकर रिकवरी कराई जाती है।
-अनिल कुमार सागर, उप कृषि निदेशक