बाराबंकी। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाओं की ऑनलाइन हाजिरी व डिजिटलाइजेशन को लेकर आठ हजार से अधिक शिक्षकों का वेतन कटने की कार्रवाई के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा। एक प्रतिशत शिक्षकों ने भी ऑनलाइन हाजिरी नहीं भरी। लेकिन शिक्षक समय से स्कूल जरूर पहुंचे। इसे लेकर अब विभाग नरम पड़ गया। अब शिक्षकों से संवाद कर इस व्यवस्था को लागू कराने की तैयारी है।
आठ जुलाई से जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी व रजिस्टरों के डिजिटलाइजेशन का आदेश जारी हुआ था। लेकिन शिक्षकों ने इसका जबरदस्त विरोध करते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। विभाग ने सख्ती दिखाते हुए 10 जुलाई को आठ व नौ जुलाई को ऑनलाइन हाजिरी ने भरने के कारण सामूहिक रूप से शिक्षकों का वेतन काटने का आदेश जारी किया। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। बृहस्पतिवार को ढाई हजार से अधिक स्कूलों में केवल 0.67 प्रतिशत शिक्षकों ने ही ऑनलाइन हाजिरी दी। इसे लेकर बीएसए संतोष देव पांडेय ने उच्चाधिकारियों से बात की। इसके बाद सभी खंड शिक्षा अशिकारियों को पत्र जारी किया गया। बीएसए ने बताया कि 11 जुलाई को वेतन कटौती की कार्रवाई रोक दी गई है। ऑनलाइन हाजिरी को लेकर शिक्षकों से संवाद किया जाएगा। उनकी परेशानियों को सुना जाएगा। इसका हल निकाला जा रहा है।
गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दे सरकार: राकेश
बाराबंकी। ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई ने बृहस्पतिपार को डीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इसे लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा गया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुजील कुमार पांडेय के निर्देश पर शिक्षक एकत्र हुए थे। जिलाध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह ने कहा कि सप्ताह के दूसरे शनिवार को अवकाश की व्यवस्था, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, ससमय स्थानांतरण व पदोन्नति का लाभ दिया जाय। कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दी जाय। इस मौके पर उमानाथ मिश्र, राजेश श्रीवास्तव, डॉ. देवेन्द्र द्विवेदी, सुनील त्रिपाठी, किरण विश्वकर्मा, श्याम किशोर बाजपेई आदि उपस्थित रहे। उधर, हैदरगढ़ में शिक्षकों ने ब्लॉक अध्यक्ष धर्मेंद्र मिश्रा बीआरसी हैदरगढ़ पर हस्ताक्षर अभियान चलाया।