साधन सहकारी समिति भवानीपुरद्दौली पर एनपीके लेने के लिए लगी किसानों की कतार।संवाद
बाराबंकी। आलू, गेहूं और सरसों के साथ दलहनी फसलों की बोआई का समय चल रहा है लेकिन समितियों पर किसानों को न तो पर्याप्त मात्रा में एनपीके मिल रही है और न ही डीएपी। ज्यादातर समितियों पर भेजी गई एनपीके खत्म हो चुकी है। डीएपी की एक भी रैक प्राप्त न होने से भयंकर संकट खड़ा है। प्रीपोजीशनिंग स्टॉक भी न के बराबर है। ऐसे में किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
जिले की जिन समितियों पर चंद बोरी खाद बची है, वहां मारामारी मची है। हालात ये हैं कि पुलिस की मौजूदगी में खाद का वितरण कराया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा डीएपी और एनपीके की दो-दो रैक की डिमांड भेजे जाने की बात कही जा रही है लेकिन खाद कब आएगी, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमर उजाला ने समितियों की पड़ताल कराई तो किसानों की समस्या उभर कर सामने आई। फिलहाल अब किसानों के सामने निजी दुकानों से खाद लेने के सिवाय कोई चारा बचा नहीं है।
अगस्त से नहीं आई डीएपी
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सहकारिता क्षेत्र में 56 एमटी डीएपी की उपलब्धता है जिसमें 25 एमटी प्रीपोजीशनिंग स्टॉक भी शामिल है। इसी तरह एनपीके 485 एमटी होने का दावा किया जा रहा है लेकिन ज्यादातर समितियों पर ताले लग चुके हैं। डीएपी की आखिरी रैक अगस्त में आई थी। पहली अक्तूबर को डीएम के निर्देश पर प्रीपोजीशनिंग में मौजूद 1896 एमटी डीएपी भी वितरण के लिए भेज दी गई थी।
भेजी गई है डिमांड
करीब 5200-5200 एमटी डीएपी व एनपीके की मांग भेजी गई है। जिलाधिकारी की ओर से भी पत्राचार किया गया है। वर्तमान में डीएपी की प्रतिदिन 150 से 200 एमटी मांग है जबकि एनपीके 300 से 400 एमटी प्रतिदिन मांगी जा रही है।
- राजितराम, जिला कृषि अधिकारी