कोटवाधाम/कोठी (बाराबंकी)। कोविड-19 की वैश्विक महामारी को लेकर बंद परिषदीय विद्यालय अनलॉक-2 में शिक्षकों के लिए एक जुलाई से खोले गए। विद्यालयों में सैनिटाइज कराने के साथ शिक्षकों को उपस्थित रहकर 12 काम कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। मगर, बेवक्त आने वाले शिक्षकों से शासन की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही। जिसके चलते सैनिटाइज करना तो दूर परिषदीय स्कूल मेंथा की पेराई के बाद बचे अवशेष व मवेशियों का ठिकाना बने है।
जिले में 3,017 परिषदीय विद्यालय है। जिनमें 2,171 प्राथमिक व 846 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। कोविड-19 को लेकर मार्च से बंद यह स्कूल शिक्षकों के लिए अनलॉक-2 में एक जुलाई से खोलने का आदेश शिक्षा निदेशक (बेसिक) सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने दिए थे। उन्होंने विद्यालयों में उपस्थित रहकर शिक्षकों से मध्याह्न भोजन के तहत परिवर्तन लागत की धनराशि विद्यार्थियों के अभिभावक के खाते समेत अन्य ब्यौरा की सूची मांगी थी। उन्होंने यू डायस का कार्य पूर्ण कराने, मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों के ब्यौरे की फीड़िंग कराने समेत मिशन प्रेरणा के तहत ई-पाठशाला का संचालन कराने को भी कहा था। वहीं कायाकल्प के विद्यालय की मूलभूत सुविधाओं के काम कराने थे।
दीक्षा ऐप के प्रशिक्षण में शामिल होना था। शारदा कार्यक्रम के तहत आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित कराना, पंजीकरण के साथ नामांकन करना व दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा का कार्य, निशुल्क कॉपी-किताबों व यूनिफार्म का वितरण तथा आनलाइन प्रशिक्षण समेत 12 कार्य विद्यालय में उपस्थित होकर करना था। शासन का आदेश मिलने के बाद बीएसए बीपी सिंह ने इसके निर्देश सभी बीईओं को देकर पालन कराने के निर्देश दिए। मगर, विद्यालयों में उपस्थित होकर शिक्षक किसी तरह कार्य कर रहे इसकी हकीकत यह तस्वीरें बयां कर रही है।