बाराबंकी। अपनी निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव देने में एमपी व एमएलए आगे हैं। जबकि विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) काफी सुस्ती बरत रहे हैं।
कांग्रेस के सांसद तनुज पुनिया ने निधि के तहत मिली दूसरी किस्त की 4.90 करोड़ की धनराशि के सापेक्ष छह करोड़ की लागत के विकास कार्य प्रस्ताव भेज थे। अब डीआरडीए ने उनसे वरीयता वाले कार्यों की सूची मांगी है। वहीं निधि के तहत विधायकों को ढाई-ढाई करोड़ रुपये मिले हैं, इनमें एमएलसी को छोड़ सभी ने अपने कार्य क्षेत्र में कराए जाने वाले कार्यों से जुड़े प्रस्ताव डीआरडीए को भेज दिए हैं। एमएलसी अंगद सिंह की तरफ से निधि के खर्च से जुड़ा एक भी प्रस्ताव नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि पूरे जिले का प्रतिनिधित्व करने के कारण एमएलसी काफी सोच विचार कर कार्य संबंधी प्रस्ताव देंगे।
सांसद तनुज पुनिया पांच विधान सभा क्षेत्रों को मिलाकर बनी बाराबंकी लोकसभा के सांसद हैं लेकिन अंगद सिंह छह विधान सभा वाले पूरे जिले के एमएलसी हैं, ऐसे में जनता को उनसे काम की अपेक्षाएं ज्यादा हैं।
सांसद तनुज पुनिया ने निधि के तहत मिली दूसरी किस्त राशि से नाली, खड़ंजा, इंटर लॉकिंग, पुलिया आदि विकास कार्यों से जुड़े 38 कार्यों के प्रस्ताव भेजे थे। प्रस्तावों का परीक्षण करने पर इन कार्यों को कराने में छह करोड़ से ज्यादा की लागत आ रही है। ऐसे में डीआरडीए की ओर से 18 अगस्त को सांसद को पत्र देकर निर्धारित धनराशि के सापेक्ष वरीयता वाले कार्यों की सूची मांगी गई है।
प्रस्ताव भेजने में राज्यमंत्री सबसे आगे
दरियाबाद विधायक एवं राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ढाई करोड़ रुपये की लागत से कराए जाने वाले कार्यों का प्रस्ताव देने में सबसे आगे हैं। उन्होंने क्षेत्र से जुड़े कार्यों के प्रस्ताव काफी पहले भेज दिए। कुर्सी विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा भी अपनी निधि से कराए जाने वाले कार्यों के सभी प्रस्ताव दे चुके हैं। सपा के सदर विधायक ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा, जैदपुर के विधायक गौरव रावत व हैदरगढ़ विधायक ने भी इतनी ही राशि के विकास कार्य कराने के प्रस्ताव डीआरडीए को भेजे हैं।