बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल को इससे निजात मिलती भी नहीं दिख रही है। हालात बेकाबू होते देख यहां के सीएमएस ने चार और डॉक्टरों की मांग सीएमओ से की थी। जिसके सापेक्ष केवल एक डॉक्टर ही मिल सकी हैं। सोमवार को ओपीडी में 300 से अधिक महिलाएं पहुंची। दर्जनों की संख्या में महिलाएं ऐसी थी जो तीन-तीन घंटे तक लाइन में लगी रहीं।
जिला महिला अस्पताल में मौजूदा समय में छह डॉक्टर हैं। इन्ही डॉक्टरों से ऑपरेशन, इमरजेंसी व वार्ड में मरीजों की देखभाल कराई जाती है। जबकि रोजाना 250 महिलाएं ओपीडी में पहुंचती है। जिसके संचालन के लिए अक्सर दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। सोमवार को अस्पताल में 300 से अधिक महिलाएं पहुंची। इनमें अधिकतर गर्भवती महिलाएं थीं। सुबह आठ बजे से ही लंबी कतार लग गई थी। कई महिलाएं 25 से 40 किमी दूर ग्रामीण इलाकों से आई थी। दो डॉक्टर ओपीडी संचालित कर रहे थे।
इस दौरान कई गर्भवती महिलाएं लाइन में खड़े-खड़े इतना परेेशान हुई कि फर्श पर ही बैठ गईं। रामवती, सुमन, सुशीला, कंचन, फूलकेसरी आदि महिलाओं का कहना था कि तीन घंटे लाइन में लगने के बाद डॉक्टर तक पहुंची। दोपहर दो बजे के बाद जब पर्चा लेकर जांच करवाने पहुंची तो पता लगा कि अब जांच का समय समाप्त हो गया है। इसलिए अब दोबारा आना होगा।
डॉक्टरों की कमी व मरीजों की भीड़ को देखते हुए सीएमएस पीके श्रीवास्तव ने 15 दिन पहले चार और डॉक्टरों की मांग सीएमओ को पत्र लिखकर की थी। लेकिन चार की बजाय केवल एक डॉक्टर ही मिल सकी। जिससे परेशानियां बरकरार हैं। सीएमएस डॉ. पीके श्रीवास्तव न बताया कि मौजूदा समय में आधा दर्जन डॉक्टर महिला अस्पताल में तैनात हैं। चार और डॉक्टरों की मांग की गई थी। जिसमें एक डॉक्टर की तैनाती हो गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
समय समाप्त होने के बाद भी लगी रही कतारें
जिला अस्पताल में भी सोमवार को भीड़ बढ़ने से व्यवस्था पटरी से उतर गई। फिजीशियन व सर्जन की ओपीडी में दोपहर दो बजे तक लाइन लगी रही। भीड़ को देखते हुए होमगार्ड जवानों को तैनात करना पड़ा। सोमवार को जिला अस्पताल में 1000 से अधिक मरीज पहुंचे।
फिजीशियन डॉ. राजेश कुशवाहा की ओपीडी में ही 250 से अधिक मरीजों के पहुंचने से काफी दिक्कतें हुईं। यही हाल सर्जन डॉ. अनिल शुक्ल की ओपीडी का था। डेढ़ सौ से अधिक मरीजों की भीड़ पहुंचने से धक्का-मुक्की भी हुई। इस दौरान एक महिला का पर्स भी उचक्कों ने गायब कर दिया। दोपहर दो बजे जब ओपीडी बंद हुई, तब भी मरीजों की भीड़ जमा थी।