बाराबंकी। कभी घरों के अंदर तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने में जुटी हैं। यूपी की महिलाओं ने अपने बूते बीते एक साल में 20 हजार करोड़ रुपये की बचत करके यह साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर भारत की असली नींव गांव और कस्बों में है।
यह चमत्कारी आंकड़ा प्रधान महिला अभिकर्ताओं व आम महिलाओं की उस मेहनत, समर्पण और आर्थिक सजगता का परिणाम है, जो महिलाओं ने अपने दैनिक जीवन में दिखाया। कहीं खेतों में काम करने वाली महिलाएं तो कहीं छोटे-मोटे रोजगार करने वाली गृहणियां, सबने रोज के खर्च में कटौती कर 5 से 10 रुपये प्रतिदिन बचाकर यह मुकाम हासिल किया।
बचत के मामले में गाजीपुर जिला शीर्ष पर रहा, जबकि अलीगढ़ आखिरी पायदान पर। अलीगढ़ को बचत को जो लक्ष्य दिया गया उसका करीब 11.84 प्रतिशत ही पूरा हो पाया। राजधानी से सटे बाराबंकी की महिलाओं ने बचत के मामले में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में छठा स्थान प्राप्त किया। यहां महिलाओं की सक्रियता और सरकारी योजनाओं का मेल देखने को मिला। बाराबंकी में करीब 194 महिलाओं को प्रधान महिला अभिकर्ता के रूप में चयनित किया गया।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जिले का बचत लक्ष्य 97 करोड़ रुपये था, फरवरी 2024 से फरवरी 2025 तक 39 प्रतिशत अधिक यानी 135 करोड़ रुपये की बचत जिले के खाते में दर्ज हुई। बाराबंकी की जिला बचत अधिकारी श्रद्धा ने बताया कि यहां महिलाएं अब पुरुषों से कहीं ज्यादा जागरूक हैं। रोज 10-20 रुपये भी जमा कराए जा रहे हैं। यह बचत नहीं, आर्थिक आजादी की ओर एक बड़ा कदम है।