बाराबंकी। महिलाएं हर क्षेत्र में बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करा रही हैं। इसके चलते ही अन्याय के खिलाफ मुखर हो कर लड़ने व पीड़ितों को न्याय दिलवाने का जज्बा महिलाओं को विधि का पेशा अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। बीते पांच वर्षों में विधि के क्षेत्र में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं की संख्या 25 से बढ़कर 150 तक हो गई है। यह महिलाएं असहाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए नि:शुल्क विधिक सहायता भी मुहैया करा रही हैं।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हिसाल बारी किदवई के अनुसार बीते पांच वर्ष के दौरान महिला अधिवक्ताओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। पांच साल पहले कचहरी में तीन हजार पंजीकृत अधिवक्ता थे, इनमें से सिर्फ 25 महिलाएं थीं। वर्तमान में कचहरी में 3500 वकीलों में से सौ से अधिक महिला अधिवक्ता हैं। यह महिला विधि का पेशा अपना कर पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की मंशा के साथ काला कोट पहनकर कोर्ट में पुरजोर तरह से विधिक अधिकारों को लेकर बहस भी करती हैं।
जिला बार एसोसिएशन में पंजीकरण कराकर चार वर्ष से वकालत कर रहीं भावना वर्मा असहाय पीड़ित महिलाओं को मुफ्त विधिक सहायता देने का कार्य करती हैं। वह अब तक करीब 30 जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त न्यायिक सहायता देकर न्याय दिला चुकी हैं।
महिला वकील यासमीन अंसारी महिलाओं को न्याय दिलाकर उनके जीवनयापन को सरल बनाती है। अपनी आवाज उठाने से हिचकिचाने वाली लगभग 25 महिलाओं को यासमीन गुजारा भत्ता दिला चुकी है।
फरीन का वकालत का कोई इरादा नहीं था, लेकिन महिलाओं के प्रति बढ़ते अन्याय को देखकर फरीन ने वकालत की पढ़ाई की और आज वह महिलाओं को उनके विधिक अधिकारों के प्रति सचेत करने के साथ ही मुफ्त विधिक सहायता देकर न्याय भी दिलवा रही हैं।
अतुल दीक्षित।