बाराबंकी। टीका छूटा नहीं कि सुरक्षा का चक्र टूटा। आपके तबेले का एक बीमार पशु सिर्फ आपका नुकसान नहीं करता, बल्कि पूरे गांव की डेयरी व्यवस्था की कमर तोड़ सकता है। दुधारू पशुओं को होने वाली संक्रामक बीमारियां पूरे क्षेत्र का दूध उत्पादन ठप कर देती हैं। पहले भी जिले के कई विकास खंडों और ग्रामीण इलाकों में लंपी स्किन, खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) और ब्रुसेलोसिस जैसी घातक बीमारियों से घरेलू पशुओं की मौत के मामले सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पूरे जिले में इन बीमारियों के फैलने की मुख्य वजह टीकाकरण अभियान के दौरान बरती गई लापरवाही है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि यदि किसी भी गांव में 20 से 30 फीसदी पशु भी टीके से वंचित रह गए, तो पूरा इलाका खतरे की जद में आ जाता है। हवा, दूषित चारे और सीधे संपर्क से फैलने वाले ये वायरस देखते ही देखते किसानों की गाढ़ी कमाई और दूध उत्पादन को मिट्टी में मिला देते हैं।
झलका दर्द, बोले साल भर से नहीं आई टीम
रसूलपुर, मीरापुर और मोहद्दीपुर जैसे गांवों में लंबे समय से सरकारी टीमें नहीं पहुंची हैं। रसूलपुर गांव के पशुपालक जवाहर लाल ने बताया कि करीब एक साल पहले गांव में सरकारी टीम आई थी, उसके बाद से कोई नहीं आया। अब पशुओं के बीमार होने पर निजी डॉक्टरों को मोटी फीस देनी पड़ रही है। मीरापुर के पशुपालक सुरेश वर्मा व बदल विश्वकर्मा का कहना है कि कई बार फोन से कर्मचारियों को सूचना दी गई, लेकिन इसके बावजूद गांव में टीकाकरण के लिए कोई नहीं पहुंचा।
टीकाकरण न होने से चार भैंसें मर गईं
सिरौलीगौसपुर के शेखपुर टूटरू गांव के पशुपालक बृजेश यादव ने बताते हैं बीते साल पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ। हमने भी ध्यान नहीं दिया और अपने पशुओं को निजी डॉक्टर को बुलाकर भी टीका नहीं लगवाया। मुझे लगा कि घर में बंधे पशुओं को बीमारी कैसे होगी। लेकिन पड़ोसी के पशु से फैले संक्रमण ने मेरे मवेशियों को भी चपेट में ले लिया। बीमारी के कारण मेरी चार भैंसें मर गईं। समय पर टीका लग जाता तो मेरी गृहस्थी तबाह होने से बच जाती।
शत-प्रतिशत टीकाकरण पर जोर
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रामक रोगों से बचाव का एकमात्र रास्ता हर्ड इम्युनिटी यानी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता है। जब तक गांव के हर एक पशु को सुरक्षा चक्र में नहीं लाया जाएगा, तब तक वायरस का खतरा बना रहेगा। पशुपालन विभाग अब छूटे हुए पशुओं की पहचान के लिए घर-घर टैगिंग और डिजिटल निगरानी प्रणाली का सहारा ले रहा है, ताकि सौ प्रतिशत कवरेज हासिल की जा सके। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि जिन क्षेत्रों में टीकाकरण अधूरा रहा है, वहां दोबारा मॉप-अप टीमें भेजी जा रही हैं। पशुपालक किसी बहकावे में न आएं और अपने सभी पशुओं का पूर्ण टीकाकरण अवश्य कराएं।