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जिला अस्पताल का हाल: ऑपरेशन कराना है तो खरीद कर लाओ सर्जरी का सामान, यहां सिर्फ ओटी और बेड मिलेगा

Wed, 28 Sep 2022 09:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अरुण पाठक, अमर उजाला, बाराबंकी

सार

बाराबंकी जिला अस्पताल में मरीजों के लिए सारी सुविधाएं मुफ्त हैं। इसके लिए प्रत्येक यूनिट को प्रतिमाह एक लाख रुपये दिया जाता है लेकिन हाल ये है कि मरीजों को टांका लगाने के लिए सूचर तक बाहर से खरीदना पड़ता है। रुई, पट्टी से लेकर दवाएं तक बाहर से लानी पड़ती हैं।
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बाराबंकी जिला अस्पताल में भर्ती आमिर और राज यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बाराबंकी जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराना है तो सर्जरी का सामान बाहर से खरीद कर लाना पड़ेगा। यहां सिर्फ ओटी और बेड की सुविधा ही मिल पाएगी। जिला अस्पताल समेत फर्स्ट रेफरल यूनिटों का कुछ ऐसा ही हाल है। यहां पर भर्ती मरीज कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि यदि उन्होंने मुंह खोला तो सुबह रेफर का पर्चा हाथ में थमा दिया जाएगा। जबकि अस्पतालों में सभी प्रकार की सुविधाएं मुफ्त हैं। इसके बाद भी यहां आने वाले मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज आमिर ने बताया कि पैर टूट गया है। एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती हूं। रुई, पट्टी से लेकर कई दवाएं तक बाहर से लानी पड़ रही हैं। यहीं नहीं ऑपरेशन करने से पहले कई जांचें तक बाहर से कराई गई। इसी वार्ड में भर्ती राज यादव ने बताया कि आज पैर के ऑपरेशन को 11 दिन हो चुके हैं। अब तक करीब 30 हजार रुपया खर्च हो चुका है।

ऑपरेशन के दौरान रुई, पट्टी से लेकर जो रॉड पैर में डाली गई है वह भी बाहर से लानी पड़ी है। अस्पताल में सिर्फ बेड और ओटी की सुविधा फ्री मिली है। बाकी तो सबके लिए पैसा ही खर्च करना पड़ रहा है। जबकि अस्पताल के पास इन सब सामानों की खरीद के लिए बजट है। इसके बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
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जिले में सबसे खराब हालत फर्स्ट रेफर यूनिटों की है। ये यूनिटें ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूताओं के लिए शुरू की गई थीं ताकि यहां पर ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराए जा सके। अप्रैल माह से अब तक 811 प्रसव ऑपरेशन के जरिए कराने का दावा किया गया है परंतु हकीकत ये है कि अप्रैल से अब तक सर्जरी का सामान किसी भी यूनिट को नहीं मिला है।

सूत्र बताते है कि ज्यादातर एफआरयू पर बेहोशी की दवा तक नहीं है। सूचर (टांका लगाने वाला धागा) तक बाहर से लाना पड़ रहा है। यहीं नहीं ड्रेसिंग के लिए रुई और पट्टी तक मरीजों को खरीद कर लानी पड़ रही है। जबकि प्रत्येक यूनिट को इसके लिए एक लाख रुपये का बजट मिलता है। इसके बाद भी यहां पर आने वाली प्रसूताओं को ये सब बाहर से खरीदना पड़ रहा है।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा का कहना है कि जिला अस्पताल में सर्जरी का पूरा सामान मौजूद है। जो सामान नहीं होता है उसकी खरीद बाहर से की जाती है। मरीजों से बाहर से सामान मंगाना पूरी तरह से गलत है। यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच कराकर ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

एसीएमओ/ नोडल अधिकारी एनएचएम डॉ. केएनएम त्रिपाठी का कहना है कि सीएचसी पर बनी फर्स्ट रेफर यूनिटें खासकर प्रसव पीड़िताओं के लिए ही हैं। यहां पर सर्जरी का सामान खरीदने के लिए अलग से बजट का प्रावधान है। इसके बाद भी यदि सर्जरी का सामान बाहर से मंगवाया जा रहा है तो यह बहुत गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी।

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