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निजी अस्पतालों की मनमानी, अप्रशिक्षितों से ले रहे काम

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बाराबंकी। निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही। संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस के नवीनीकरण को दर किनार कर ऐसे अस्पतालों में नाम मात्र के वेतन पर अप्रशिक्षितों से काम काज लेकर मरीजों की जान को भी संकट में डाला जा रहा है। बिना प्रशिक्षण व अनुभव के ही यह कर्मी ओटी से लेकर मरीजों को दवा इत्यादि देने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर शिकायत बाद भी कार्रवाई न किए जाने से अस्पताल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। जिले में मौजूदा समय में पजीकृत अस्पतालों की संख्या 110 के आसपास बताई जा रही है। लेकिन इनमें से 15 ऐसे अस्पताल संचालक हैं जिन्होंने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण तक नहीं कराया है।
विभागीय अधिकारियों की जांच में सामने आया कि पंजीकरण कराने के दौरान तो अस्पताल संचालक डिप्लोमा धारकों की डिग्रियां लगा देते हैं लेकिन बाद में सभी काम काज अप्रशिक्षित के जिम्मे सौंप दिए जाते हैं। जांच के दौरान जो लोग कार्य करते मिले उनके पास न तो कोई डिग्री थी और न ही डिप्लोमा।
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यह अप्रशिक्षित मरीजों को दवाई देने से लेकर ओटी में आपरेशन तक कराने की जिम्मेदारी निभाते हैं। जांच में इसकी पुष्टि के बाद भी विभागीय अधिकारी इन निजी अस्पताल संचालकों के रसूख के आगे किसी भी प्रकार की कार्रवाई कर पाने को लेकर चुप्पी साधे हैं।
बिना नक्शा पास भवनों में चले रहे अस्पताल
कई अस्पताल तो ऐसे भवनों में चल रहे हैं जिनका नक्शा तक पास नहीं है। हाईवे के निकट संचालित एक अस्पताल का संचालन बिना भवन का नक्शा पास कराए ही धड़ल्ले से चल रहा है। विनियमित क्षेत्र के अधिकारियों की माने तो ऐसी कई शिकायतें मिली हैं जिनकी जांच की जा रही है।
कोरोना की वजह से निजी अस्पतालों की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा सका लेकिन अब इसके लिए बकायदा एक टीम बना दी गई है जो नियमित निजी अस्पतालों की जांच करेंगी। इस दौरान जिन अस्पतालों में किसी भी प्रकार की खामियां पाई जाएंगी तो उस अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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डॉ. बीकेएस चौहान, सीएमओ
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