घाघरा नदी विकराल रूप धारण करने लगी है। नदी का पानी खतरे के निशान से 39 सेमी ऊपर पहुंच गया है। नदी का जलस्तर एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
पानी की चपेट में आकर सिरौलीगौसपुर के सरदहा में बना उपस्वास्थ्य केंद्र और परसावल का आगंनबाड़ी केन्द्र नदी में समा गया है वहीं विद्यालय के किनारे पानी भर गया है। यही नहीं तराई के करीब 25 गांवों तक पानी पहुंच गया है। वहीं आधा दर्जन गांवों के किसानों की खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई है।
सबसे खराब हालात टिकैतनगर क्षेत्र के पांच गांवों के हैं यहां के लोगों का पलायन जारी है इन लोगों को नाव से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के करीब 25 गांव ऐसे हैं जिन तक नदी का पानी पहुंचने से यहां के लोगों में हड़कंप मच गया है। लोगों का कहना है यही हाल रहा तो रात तक पानी गांव के अंदर तक पहुंच जाएगा।
नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.466 तक पहुंच गया है यह खतरे के निशान से 39 सेमी ऊपर बह रहा है। नदी का जलस्तर अभी भी एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। जिन पांच गांवों में पानी भर गया है वहां के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन शुरू कर दिए हैं।
यहीं कुछ लोगों को नाव के द्वारा बंधे पर ले जाकर बसाया जा रहा है। एसडीएम सिरौलीगौसपुर प्रभाकांत अवस्थी सोमवार को अन्य अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया और कर्मचारियों को बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए।
तटबंध में आई चौड़ी दरार
सिरौलीगौसपुर प्रतिनिधि के अनुसार सनावा, बंधौली, अहिरनपुरवा, सरायं पुरूखू, कहारनपुरवा, बयां पुरवा, दोहड, सिरौली गुंग, महतवपुरवा, टांई, पसुवा, मुनवापुरवा, कोठी डीहा, बबुरी, टेपरवा, सरसा, कोपवा, लालापुरवा, नामीपुर, सिरौली, भंवरी कोला, गोबरहा और पासिन पुरवा तक पानी पहुंच गया है।
यहां के रामकैलाश, सुशील, उदयराज, कमलेश, बाबूराम, सर्वजीत और राजेन्द्र ने बताया कि गांवों तक नदी का पानी पहुंच जाने से मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। इन लोगों ने बताया कि जिस तरह से नदी का पानी बढ़ रहा है यही हाल रहा तो रात तक पानी गांव के अंदर तक पहुंच जाएगा।
लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कर्मी क्षेत्र में नहीं आया है। लोगों ने बताया कि जो तटबंध बना है उसमें एक चौड़ी दरार हो गई है इससे तटबंध को खतरा बना गया है।
सौ से ज्यादा स्पर बहे
टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार सबसे खराब हालात परसावल, नैपुरा, कमियार, रायपुर और गोपीपुरवा के हैं। यहां पर गांवों में पानी भर गया है लोग परिवारीजनों और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करने लगे हैं। जिन लोगों को गांव से निकाला जा रहा है उन्हें बंधे पर बसाया जा रहा है।
परसावल के निकट 8 नावें लगाई गई हैं जिनके माध्यम से लोगों को बंधे पर पहुंचाया जा रहा है। यहां पर बना आंगनबाड़ी केंद्र नदी में समा गया है। जबकि 20 से 25 परिवार अभी भी ऐसे हैं जो गांव में फंसे हुए हैं। चरसरी तटबंध को बचाने के लिए बोरियों से बनाए गए सौ से ज्यादा स्पर नदी के पानी में बह गए हैं।
जिसकी वजह से नदी के पानी ने तटबंध को अपनी चपेट में ले लिया है और कटान शुरू कर दी है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। जिससे जो परिवार बंधे पर हैं उन लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
फसलें भी डूब गईं
उधर सूरतगंज क्षेत्र के माधवपुरवा, चौधरी पुरवा, पुरैन पुरवा, बल्लोपुर में खेतों में लगी किसानों की फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई है। यहीं नहीं नदी का पानी इन गांवों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जिससे यहां के रहने वाले ग्रामीण बोरिया बिस्तर समेट कर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी में लग गए हैं।
नदी का पानी खतरे के निशान से 39 सेमी ऊपर पहुंच गया है। यह सही है कि नदी का पानी कई गांवों के किनारे तक पहुंच गया है। जिन गांवों में पानी पहुंच गया है वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
बंधे को बचाने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र के एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह जलस्तर पर नजर रखने के साथ ही पीड़ितों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास करें। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी