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Barabanki News: शुद्ध पर्यावरण और दिव्य चेतना से समग्र विकास

Mon, 09 Mar 2026 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। जब मनुष्य प्रकृति की पवित्रता और ईश्वर की शरण को स्वीकार करता है, तभी उसके जीवन में सच्चा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास संभव होता है। बहुता धाम में चल रहे मानस सम्मेलन के सातवें दिन वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ज्ञान से ओतप्रोत हो उठा।
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कथा व्यास डॉ. कृष्णकुमार मिश्र ने कहा कि जगत की जननी माता सीता ही सम्पूर्ण सृष्टि की आधारशक्ति हैं। उन्हीं की दिव्य शक्ति से सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार का चक्र संचालित होता है। अयोध्या कौशल्या घाट के महंत सुकृपा दास जी ने कहा कि श्रीराम का अवतार मानव मात्र को आदर्श जीवन और चरित्र की शिक्षा देने के लिए हुआ। पंडित रामकिंकर मिश्र ने आध्यात्मिक चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब तक मनुष्य सांसारिक विषयों और मोह-माया में आसक्त रहता है, तब तक वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त नहीं हो सकता। पंडित कृष्णकुमार तिवारी ने प्रकृति और आध्यात्मिकता के गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने हमें पर्यावरण की रक्षा का पवित्र संदेश दिया है। शुद्ध और पवित्र पर्यावरण केवल शरीर को स्वस्थ ही नहीं बनाता, बल्कि मन और बुद्धि को भी निर्मल और तेजस्वी बनाता है। कथा व्यास पं. स्वामी दीन शुक्ल ने कहा कि जीवन में धन अर्जित करना ही सबसे बड़ा लक्ष्य नहीं है। दीनबंधु महाराज ने भक्ति के सरल मार्ग को समझाते हुए कहा कि छल-कपट से दूर रहकर सच्चे मन से भगवान की भक्ति करना ही वास्तविक साधना है। वीर रस के कवि रामेश्वर द्विवेदी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास के राम केवल आध्यात्मिक आदर्श ही नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति प्रेम और सेवा की प्रेरणा भी देते हैं। उनके जीवन से राष्ट्रभक्ति, धर्म और संस्कृति के संरक्षण की चेतना जागृत होती है।
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