लगातर बढ़ रही घाघरा नदी अपना विकराल रूप धारण कर रही है। इससे तरई में बसे गांवों में दहशत और बढ़ गई है। बुधवार सुबह तक घाघरा ने करीब एक दर्जन गांवों को चारों ओर से घेर लिया है।
साथ ही परसावल, मांझा रायपुर व नैपुरा गांवों में घरों तक में पानी घुस गया है। जिससे यहां के लोगों ने पलायन तेज कर दिया है। गांवों से पलायन कर रहे ग्रामीण नदी के तटबंध पर अपना आशियाना बनाने में लगे हैं। लेकिन इन सबसे प्रशासन अनजान बना है।
घाघरा नदी में आए बाढ़ के पानी ने अभी से तबाही मचानी शुरू कर दिया है। लगातार घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे तरई क्षेत्र के गांवों में दहशत का माहौल हैं। तहसील रामसनेही घाट व तहसील सिरौलीगौसपुर के दर्जन भर गांवों को घाघरा नदी के बाढ़ के पानी ने घेर लिया है। कई गांवों में घरों के अंदर पानी घुस गया है।
तहसील सिरौली गौसपुर के तेलावारी, इटहुआ पूरब, बासगांव, गोपीपुरवा और तहसील रामसनेहीघाट के कमियार, परसावल, मांझा रायपुर, नैपुरा आदि दर्जन भर गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुके है। लेकिन प्रशासन तराई क्षेत्र के ग्रामीणों की इस समस्या से लेकर अंजान बना हुआ है। उधर ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है।
घरों के अंदर घुसा घाघरा का पानी
लगातार बढ़ रहे घाघरा के जलस्तर से तराई क्षेत्र के परसावल, रायपुर, नैपुरा गांवों में बाढ़ का पानी घरों घुस गया है। जिससे यहां के ग्रामीण घरों में अपना सामान छोड़ कर पलायन करने के विवश हैं। लोगों द्वारा लगातार गांव से पलायन जारी है।
सामान बटोरने में लगे हैं प्रभावित ग्रामीण
घाघरा नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने से तेलावारी, इटहुआ पूरब, बासगांव, गोपीपुरवा व कमियार आदि गांव पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। लेकिन अभी इन गांवों में घर के अंदर पानी नहीं घुस है। जिससे इन गांवों के ग्रामीण अपना गृहस्थी का सामान बटोरने में लगे हैं। साथ ही लोग नावों से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
तटबंध पर बनाए जा रहे आशियाने
घाघरा नदी के लगातार बढ़ने से ग्रामीणों के पलायन में तेजी आती जा रही है। लगातार ग्रामीण नावों से तटबंध पर पहुंच रहा है। इस तटबंध पर ग्रामीण अपना आशियाना बनाने में लगे हैं। लेकिन प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी अभी तक प्रभावित ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सके हैं।
बाढ़ के हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभागीय कर्मचारी मुस्तैद हैं। ग्रामीणों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। कुछ गांव जो नदी के बीच वहां थोड़ा पानी भरा है।
हरिकेश चौरिसयिा, अपर जिलाअधिकारी