‘भारत का निर्मल बनैवे, घर मा शौचालय बनैवे’ जैसे जागरूकता गीतों व नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर ऑडीटोरियम में मौजूद सभी प्रधानों को अपने गांवों में व्यापक स्तर पर शौचालय बनाने के लिए जागरूक किया गया। मौका था एक दिवसीय ग्राम प्रधान प्रशिक्षण व कार्यशाला के आयोजन का।
कार्यशाला में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, डीपीआरओ आदि ने योजनाओं के बारे में जानकारी दी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में बने ऑडीटोरियम में बुधवार को एक दिवसीय जनपद स्तरीय ग्राम प्रधान प्रशिक्षण व कार्यशाला का आयोजन पंचायती राज विभाग की ओर से किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी ने दीप जलाकर किया। प्रधानों व उनके प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अजय यादव ने कहा कि आज के दौर में काफी शिक्षित व युवा वर्ग प्रधान के रूप में गांव की सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए हैं।
जनता ने उन्हें चुना है, उनकी उम्मीदों पर शत प्रतिशत खरा उतरें। सीडीओ ऋषिरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम सभा का गठन 1959 में सबसे पहले राजस्थान में ट्रायल के रूप में किया गया। गांव की यह सरकार विकास कार्य के लिए धुरी साबित हुई, जिसके बाद इसका विस्तार कर पूरे देश में लागू कर दिया गया।
जिला पंचायत राज अधिकारी अभय कुमार शाही ने प्रधानों से कहा कि योजनाओं की डायरी बनाई गई है जिसमें सभी प्रकार की योजनाओं के बारे में व उनसे संबंधित अधिकारी का मोबाइल नंबर भी दिया हुआ है। प्रधान योजनाओं के बारे में अपनी राय व शिकायत उसी नंबर पर दर्ज कराकर अपना सुझाव दे सकते हैं। कार्यक्रम के संयोजन में नेहरु युवा केंद्र के स्वयंसेवियों की अहम भूमिका रही।