बाराबंकी। देशभर में बढ़ते साइबर अपराध के जाल में बाराबंकी का नाम भी तेजी से जुड़ने लगा है। गृह मंत्रालय से आई खुफिया रिपोर्ट में बाराबंकी से जारी हुए 281 मोबाइल सिमों का इस्तेमाल साइबर ठगी में होता मिला है। रिपोर्ट आने के बाद साइबर सेल ने चिह्नित सिम नंबरों से जुड़ा ब्योरा खंगालना शुरु कर दिया है।
इन संदिग्ध सिमों का इस्तेमाल झांसा देकर रुपये का भुगतान कराने, डिजिटल अरेस्ट करने, ब्लैक मेलिंग करने के साथ ही ऑन लाइन ठगी के अन्य मामलों में होने की बात सामने आई है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज होने वाले मामलों में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों की जांच शुरू हुई तो 281 सिम कार्ड बाराबंकी से जुड़े मिले। इनका इस्तेमाल देशभर में बैंक खाते खोलने, ऑनलाइन ठगी करने और व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय करने में होता मिला।
पुलिस का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सिम विक्रेताओं की मिलीभगत से फर्जी पहचान पत्र पर इन सिम कार्ड को जारी कर साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा होगा। साइबर सेल प्रभारी विनय कुमार राय ने बताया कि फिलहाल सभी 281 मोबाइल नंबरों का इतिहास खंगाला जा रहा है। इस दौरान सिम बेचने वाले दुकानदार, सिम खरीदने वाले उपभोक्ता के साथ वर्तमान में इसके असली उपयोगकर्ता के संबंध में जांच हो रही है। पुलिस की नजर उन गिरोहों पर भी है जो फर्जी आधार कार्ड बनाकर सिम एक्टिवेट करवाते हैं। (संवाद)
साइबर ठगी से बचने के लिए रहे सावधान
साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि अपना आधार या पहचान पत्र किसी अजनबी या अनधिकृत व्यक्ति को न दें। मोबाइल सिम लेते समय पूरी जानकारी और दस्तावेजों का मिलान करें। कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन पर इसकी सूचना दर्ज कराए।