घाघरा नदी का पानी कचनापुर गांव का अस्तित्व
समाप्त करने को आतुर दिख रहा है। नदी की धारा में लोहिया आवास समेत गांव के
चार और लोगों के घर समा गए हैं। नदी का पानी गांव में बनी मस्जिद तक पहुंच
गया है। जिससे मस्जिद के नदी में समाने का खतरा बढ़ गया है। इस गांव में
लगभग 70 घर हैं। अब तक 25 घर घाघरा लील चुकी है। गांव अस्तित्व से लोगों
का पलायन शुरू हो गया है। लोग परिवार समेत सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने
लगे हैं।
घाघरा नदी के तेवर दिन प्रतिदिन और तीखे होते जा रहे हैं। कचनापुर गांव नदी
के प्रकोप का शिकार हो रहा है। नदी की चपेट में आकर अब तक 21 घर पानी में
समा चुके हैं। मंगलवार को तीन और बटोही, इश्तियाकुल और हशमत के घर नदी में
समा गए हैं। इसके अलावा किलौली, अजमत, अलाउद्दीन और सिराजु के मकान कटान की
चपेट में हैं। इन लोगों की मानें तो नदी का पानी जिस तरह से कटान कर रही
है उससे ये घर भी किसी भी समय नदी के पानी में समा सकते हैं।
गांव के लोगों
का कहना है कि नदी का पानी गांव की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नदी के पानी ने
गांव में बनी मस्जिद को अपनी चपेट में ले लिया है जिससे मस्जिद के नदी में
किसी भी समय समाने का खतरा बना हुआ है, लेकिन प्रशासनिक अमला इस ओर कोई
ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे हम लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़
रहा है। वहीं, इश्तियाकुल निशा का लोहिया आवास भी नदी की भेंट चढ़ गया है।
इनके घर के बाहर लगा इंडिया मार्का हैंडपंप भी पानी में डूब गया है जिससे
लोगों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है जिन लोगों के मकान नदी में
समा गए हैं उनके सामने भी तमाम दिक्कतें पेश आने लगी हैं, लेकिन इसका
समाधान नहीं निकल पा रहा हैं। इस गांव में लगभग 70 घर हैं। अब तक 25 घर
घाघरा लील चुकी है। गांव अस्तित्व से लोगों का पलायन शुरू हो गया है।
लोग
परिवार समेत सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने लगे हैं। वहीं, पीड़ित तमाम
प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस बाबत एसडीएम रामनगर जयप्रकाश का
कहना है कि कचनापुर गांव घाघरा नदी की कटान की चपेट में आ गया है। यहां के
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़ितों की
मदद के लिए नायब तहसीलदार को गांव भेजा गया है।