नकली खाद बनाने का कारखाने चलाने वाले अग्रवाल एग्रीकल्चर के एक दूसरे गोदाम पर मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी छापा मारा। इस अवैध गोदाम से 13 सौ बोरी खाद जब्त की गई है।
जांच पड़ताल के दौरान गोदाम संचालक विकास अग्रवाल किसी प्रकार के कोई अभिलेख नहीं दिखा सका। इस कारण गोदाम को सील कर दिया गया है।
दरअसल, रविवार को प्रशासन जब इसके गोदाम पर छापा मार नकली खाद का कारखाना पकड़ा था तो कार्रवाई के बाद इसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था। उसी के बाद इस गोदाम पर कार्रवाई की गई।
नकली खाद बनाने का भंडाफोड़ होने के बाद जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र के तेवर और तल्ख हो गए हैं। उन्होंने सोमवार को दो टूक कहा था कि जिले में कहीं पर खाद में गड़बड़ी पाई गई तो जिला कृषि अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी की सख्ती देख जिला कृषि अधिकारी ने मंगलवार को शहर से कुछ दूरी पर गायत्री मंदिर के निकट बने अग्रवाल एग्रीकल्चर के दूसरे गोदाम पर छापा मारा। यहां लाइसेंस निलंबित किए जाने के बावजूद खाद की बिक्री की जा रही थी।
जांच पड़ताल के दौरान गोदाम के अंदर 432 बोरी एनपीके 10.26.26, 215 बोरी एनपीके 20.20.0, जैविक नार्गाजुना 245 बोरी, 36 बोरी कैल्शियम भूमि सुधार एनपीके 15.15.0 व अन्य प्रकार की 605 बोरी पाई गई है। गोदाम संचालक विकास अग्रवाल से इसके अभिलेख मांगे गए तो वह कोई अभिलेख नहीं दिखा सका। जब इनसे पूछा गया कि लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद भी खाद की बिक्री किस आधार पर की जा रही है इसका भी वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जिस पर जिला कृषि अधिकारी ने इनके गोदाम को सीज करते हुए गोदाम में रखी 13 सौ बोरी खाद को जब्त कर लिया है।
बड़े नेताओं का कार्रवाई न करने का दबाव
नकली खाद का कारोबार करने वाले विकास अग्रवाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में प्रशासन को पसीना छूटने लगा है। दरअसल इसके पिता धीरज अग्रवाल आरएसएस के पदाधिकारी हैं। इनकी पहुंच सभी पार्टियों में है। चर्चा है कि इसकी के चलते इसकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है। विकास के मामले को हल्के में निपटाने का आदेश भी सफेदपोशों की तरफ से आने लगे हैं। हालांकि उच्चाधिकारी इस बात से इंकार कर रहे हैं, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो सत्ताधारी दल के कई नेता विकास पर कार्रवाई न करने के लिए अधिकारियों को बराबर फोन कर रहे हैं।
धोखाधड़ी की भी रिपोर्ट दर्ज होगी
नकली खाद का कारोबार करने वाले खाद विक्रेता विकास अग्रवाल को आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं में तो रिपोर्ट दर्ज हो गई है। पुलिस ने इसकी जांच पड़ताल भी शुरू कर दी है। गोदाम की चौहद्दी छिपाने के मामले में इन पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट भी दर्ज की जाएगी। पुलिस इस दिशा में भी जांच पड़ताल कर रही है।
पूरे जिले में फैला खाद माफिया का जाल
नकली खाद का कारोबार करने वाली अभी कई और बड़ी मछलियां इस धंधे में सक्रिय हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। शहर के अलावा हैदरगढ़, सुबेहा, चौबीसी फतेहपुर, रामसेनहीघाट आदि में नकली खाद बनाने वाले माफिया पूरी तरह से सक्रिय हैं। यह नकली खाद को महंगे ब्रांड की बोरियों में भरकर किसानों को बर्बाद कर रहे हैं। नकली खाद का कारोबार करने वाले ये माफिया अपने जेबें भर रहे हैं, लेकिन दिन रात हांड तोड़ मेहनत करने वालेे किसानों को कंगाल बना रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी आरके यादव ने बताया कि लाइसेंस निलंबित किए जाने के बावजूद खाद की बिक्री किए जाने पर अग्रवाल एग्रीकल्चर के दूसरे गोदाम पर छापा मारा गया। जांच पड़ताल के दौरान गोदाम में विभिन्न प्रकार की करीब 13 सौ बोरी खाद बरामद हुई है। लेकिन गोदाम संचालक इससे संबंधित कोई अभिलेख नहीं दिखा सका। जिस पर गोदाम को सीज करते हुए इन्हें नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया गया है।
नगर कोतवाल शशिकांत मिश्रा ने बताया कि हाईकोर्ट का आदेश है कि मारपीट के मामले को बाकी सब में जब तक आरोप साबित न हो जाए तब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी। नकली खाद बनाने की जांच की जा रही है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी
कृषि अधिकारी बोले, पुराने मामले नहीं जानता
कृषि विभाग की टीम ने दिसंबर 2007 में अग्रवाल एगग्रीकल्चर के गोदाम पर छापा मारा था। इस दौरान भारी मात्रा में नकली खाद बनाए जाने का भंडाफोड़ हुआ था। इस मामले में कोतवाली नगर में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जिसमें विकास को जेल भी जाना पड़ा था, लेकिन विभागीय अधिकारी की लापरवाही और कड़ी पैरवी न किए जाने की वजह से विकास को खाद का कारोबार करने के लिए फिर से लाइसेंस मिल गया। अब जब इस मामले में जिला कृषि अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामला उनके समय का नहीं अभिलेखों को खोजा जा रहा है। कार्रवाई को लेकर किस स्तर पर लापरवाही बरती गई है इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेेजी जाएगी।