घाघरा नदी में महीने भर से चल रहा उतार चढ़ाव के बाद जलस्तर सबसे अधिक खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया है। इससे रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के पांच दर्जन गांव जलमग्न हो गए हैं। नाव न मिलने की वजह से बाढ़ पीड़ित गांव से पैदल ही पलायन करने लगे हैं। वहीं एडीएम और एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दौरा किया और बाढ़ पीड़ितों की यथा संभव मदद करने का आश्वासन मौके पर मौजूद अधिकारियों को दिया है।
घाघरा नदी का जलस्तर रविवार को खतरे के निशान से 66 सेमी ऊपर पहुंच गया है जो अब तक सबसे ज्यादा जलस्तर है। नदी का पानी बढ़ने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के करीब 60 गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। वहीं एक दर्जन गांव पानी से कभी भी घिर गए हैं। क्योंकि नदी का पानी बहुत ही तेजी से इन गांवों की ओर बढ़ रहा है।
सबसे ज्यादा खतरा सूरतगंज क्षेत्र में बना हुआ है। गांवों में पानी भर जाने की वजह से लोग घरों से पानी में ही होकर पैदल सुरक्षित स्थानों की ओर गृहस्थी का सामान लेकर निकल लिए हैं। इनके साथ बच्चों और मवेशियों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है।
प्रशासन का दावा है कि बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने लिए 18 नावें लगाई गई है। मगर, हकीकत इससे इतर है। रामनगर का तपेसिपाह परिषदीय स्कूल भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। प्रशासन ने बंधे पर पहुंच चुके सुंदरपुर, कोडरी व कंचनापुर के 125 परिवारों को राहत सामग्री मुहैय्या कराया। वही तत्काल लाभ पहुंचाने के लिए लंच पैकेट भी बांटे।
रामनगर तहसील के हेतमापुर, राइन ,तकिया, मदरहा, कोयलीपुरवा, सकतापुर, कांशीरामपुरवा, बबुरी, आबादी, बेलहरी, केदारीपुरवा, बाबापुरवा, कंचनापुर, खुज्जी, महाबीरपुरवा, जमका, परशुरामपुर, फाजिलपुर, पूरनपुर, रैकलवा, बिझौली, कुशवाथारा, अशरफपुर, सुंदरनगर, बड़ी कोडरी, छोटी कोडरी, ललपुरवा, बलईपुर, बेलहरी, कुशौरा, बेहटा तमरसेपुर, कुडीन बड़ा गांव, पर्वतपुर, कोड़री, मल्लाहनपुरवा, चौधरीपुरवा, गायघाट, बाल गोविंद पुरवा, पंडितपुरवा, सुमिरनपुरवा व रामसनेहीघाट तहसील के कमियार, कोइलावर, ढेमा, दुनौली, टिकरी, मलदहा, गढ़ी, बांसगांव, उमरहारा, अतरसुइया, सिकरी जीवल सेमरी बसंतपुर व सिरौलीगौसपुर तहसील के नाऊनपुरवा, नया पुरवा समेत करीब 60 गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं।