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जलस्तर घटा, लेकिन नहीं थम रही बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां

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बाराबंकी। तराई में भले ही घाघरा का जलस्तर कम हो गया हो लेकिन बाढ़ पीड़ितों की समस्या कम नहीं हो पा रही है। अभी भी पीड़ित गांवों से पलायन कर रहे हैं। बाढ़ के चलते करीब एक दर्जन गांवों की बीस हजार की आबादी प्रभावित है। लोग तटबंध पर बसेरा बनाने में लगे हैं। घाघरा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 17 सेमी ऊपर है।
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लगातार चार दिनों से बढ़ रहे घाघरा के जलस्तर में बुधवार को कमी तो आयी किंतु तराई वासियों की मुश्किलें अभी भी जस की तस बनी हुई हैं। इस समय नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर है।
जलस्तर में कमी आने से तराईवासी कुछ राहत जरूर महसूस कर रहे है लेकिन इस समय क्षेत्र में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ने से हर कोई परेशान है। अभी भी ग्रामीण नदी में अचानक पानी बढ़ने की आशंका से घरों से पलायन करके अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर निवास कर रहे हैं।
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सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत घाघरा की तलहटी में बसे गांव सरायसुरजन, टेपरा व भौरीकोल आदि गांव पानी से अभी भी घिरे हुए हैं। बाढ़ से करीब बारह गांवों की बीस हजार से भी अधिक आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
क्षेत्र के सिरौलींगुंग, बीहड़, भया का पुरवा आदि गांवों में भी पानी भरा हुआ है। सड़क, खेत-खलिहान सब जलमग्न हैं जिसके चलते ग्रामीणों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर निवास कर रहे परिवारों को भी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सिरौलीगौसपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार सिंह ने टीम के साथ मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र का दौरा किया। टीम ने बुखार, दस्त, जुखाम व खांसी आदि रोगों से पीड़ित लोगों की जांच करके दवा का वितरण किया है। वहीं जिला प्रशासन की टीम भी बाढ़ग्रस्त इलाके में पीड़ितों को हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
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