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Flood in Barabanki: सरयू की तबाही का दंश झेल रहे पीड़ितों की गुहार, साहब! अलग कहीं बसाए देव

Sat, 15 Oct 2022 04:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी

सार

बाराबंकी में जिलाधिकारी ने सरयू की तबाही का दंश झेल रहे पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें सरकारी मदद का भरोसा दिलाया। करीब दो लाख से अधिक आबादी तटबंधों पर जीवन गुजार रही है।
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बाराबंकी के हेतमापुर बाढ़ क्षेत्र में स्टीमर पर बैठ कर निरीक्षण करते जिलाधिकारी अविनाश कुमार व ? - फोटो : BARABANKI
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विस्तार
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तराई में सरयू की तबाही का दंश झेल रहे बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने सरकारी अमला तटबंध से उतरकर उनकी चौखट तक पहुंच गया। एक छोर पर मंत्री तो दूसरे पर डीएम सुबह ही बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे। बाढ़ पीड़ितों ने उनसे कहा कि साहब जमीन दईकय कहीं अलग घर बसाए देव। इस पर डीएम ने आश्वासन दिया कि जमीन का इंतजाम कर तुरंत मकान मिलेगा। उधर मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी तो चारे से लेकर इलाज और अन्य सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निर्देश दिए। मंत्री, डीएम व एडीएम के इस कदम के बाद तहसील प्रशासन भी सक्रिय नजर आया।

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जिले की तीन तहसीलों के 150 गांवों की दो लाख से अधिक आबादी पिछले एक सप्ताह से पानी से घिरे घरों और तटबंधों पर जीवनयापन कर रही है। बारिश ने इनके सामने और संकट बढ़ा दिया था। डीएम अविनाश कुमार और एडीएम राकेश सिंह ने शुक्रवार को रामनगर तहसील के ललपुरवा और कोड़री गांव का निरीक्षण किया। दोनों गांव बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण वहां के लोगों से संपर्क कट चुका था। अमर उजाला में इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद दोनों अफसरों ने वहां देखा तो मकान पूरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ललपुरवा के कमलेश, रजपता, रामकली, चंद्रभान व कोड़री के बबूल, छंगालाल, राजकुमार व बंशीलाल से बात की तो सभी ने अलग बसाने की गुहार लगाई है। डीएम ने एक-एक से बात करने के बाद निर्देश दिया कि जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें सूचीबद्ध कर आवासीय योजना का लाभ तुरंत दिया जाए।

डीएम ने यहां पर भोजन सामग्री का वितरण किया तथा गर्भवती महिलाओं का ब्यौरा जुटाने और टायफाइड, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों की जांच कराने के लिए तत्काल निर्देश दिए। डीएम ने फसलों के नुकसान का सर्वे तुरंत कराने को कहा। कई दिनों से बाढ़ का दंश झेल रहे पीड़ितों ने अपने बीच डीएम को पाकर काफी राहत महसूस की। उन्हीं के सामने डीएम ने एसडीएम, लेखपाल और प्रधान को बंधे के उस पार जमीन तलाश कर बाढ़ पीड़ितों का बसाने का भरोसा दिलाया। उधर खाद्य रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा रामसनेहीघाट के खजुरी और रामनगर के हेतमापुर में सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों से रुबरू हुए। यहां बाढ़ पीड़ितों ने जहां नदी के कटान की शिकायत की तो दोनों जगह कोड़री के दुखीराम, सुशीला देवी, खुशीराम, रमापति, अयोध्या, मंशा, कुलदीप व अर्जुन से बात कर राहत सामग्री भी सौंपी।
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बाढ़ पीड़ितों के खाते से नहीं कटेगी मुआवजे की राशि
बाढ़ पीड़ितों ने मंत्री से शिकायत की मिलने वाली मुआवजा राशि को बैंक कर्मचारियों द्वारा केसीसी के बकाए से पैसा काट लिया जाता है। आवश्यकता होने पर नहीं मिलता है। मंत्री ने एलडीएम से बात कर कहा कि किसान सम्मान निधि और आपदा राहत से मिले मुआवजे का पैसा किसी कर्ज में न काटा जाए।

घटने के बाद 56 सेमी. खतरे के निशान से ऊपर बह रही सरयू
सातवें दिन से बैराजों से छोड़े गया नेपाल का पानी घटने लगा है। सरयू शुक्रवार को खतरे के निशान से 56 सेमी. ऊपर बह रही थी। इससे साफ है कि तराई के गांवों में स्थिति अभी नाजुक बनी हुई है। क्योंकि बारिश ने बाढ़ पीड़ितों का दर्द दोगुना बढ़ा दिया था। पर आसार हैं कि धीरे-धीरे स्थिति में सुधार आएगा।

निशान बता रहे हैं मंजर, सड़कें बनी नदी
सूरतगंज का हेतमापुर मार्ग हो या फिर सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के सनावा गांव जाने वाले मार्ग पर नदी का पानी बह रहा है। कई जगह कटान और जलभराव के बीच बाढ़ पीड़ित किसी तरह निकल रहे हैं। जिस तरह के हालात हैं उसका अंदाजा लगाना हो तो सिरौलीगौसपुर के टेपरा गांव में खड़े बच्चे के सामने छप्पर के निशान बता रहे हैं कि पानी कहां तक पहुंचा था और अब उसके आशियाने का हश्र क्या होगा।

स्वास्थ्य की देखभाल को लगीं 10 टीमें
एडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण कराया गया। पीड़ितों की मदद के लिए 10 बाढ़ चौकियां, 13 बाढ़ शरणालय व 18 राहत वितरण केन्द्रों, तीन वायरलेस पुलिस चौकी, 10 पशु शिविरों का संचालन कराया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तीन सेक्शन बाढ़ पीएसी व एसडीआरएफ की टीम मौके पर तैनात की गयी हैं। स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 10 मेडिकल टीमों लगाई गई हैं। बाढ़ प्रभावितों को राहत सहायता व राहत वितरण का कार्य कराया जा रहा है।

राहत और बचाव कार्य में जुटी है पूरी टीम
जिलाधिकारी अविनाश कुमार का कहना है कि बाढ़ से घिरे ललपुरवा और कोड़री गांव में नाव से जाकर बाढ़ पीड़ितों से बात की, उनकी समस्याओं को सुना और उनसे मिले सुझावों पर आबादी वाले क्षेत्र में उन्हें अलग से बसाने के लिए सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। राशन, दवाओं का वितरण किया जा रहा है। क्लोरीन की गोली बांटी जा रही हैं। मलेरिया के कुछ केस सामने आए हैं। उन्हें दवाएं पहुंचाई गई हैं।

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