बाराबंकी। मौसमी बदलाव के साथ ही बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। बुखार से पीड़ित कक्षा 11 की एक छात्रा की इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में भी 500 से अधिक बुखार पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें मलेरिया, टायफायड के साथ ही डेंगू के लक्षण वाले मरीजों के चिह्नित होने से परेशानी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी से वार्ड तक बुखार पीड़ितों से फुलहहो गए हैं। जिले में बुखार से अब तक चार लोगों की मौतें हो चुकी हैं। दरियाबाद ब्लॉक के कोटवाधाम गांव निवासी दिनेश कश्यप की पुत्री नंदिनी कश्यप (16) पांच दिन से बुखार से पीड़ित थी। उसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवाधाम और बाद में सिरौलीगौसपुर संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया था। बुखार न उतरने पर परिजनों ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से छात्रा को सफेदाबाद स्थित निजी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, वहां मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी की ओपीडी में भी बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित इलाज के पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में बुधवार को ओपीडी में पंजीकृत 1950 मरीजों में से 500 से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित थे। मरीजों के कारण अस्पताल की इमरजेंसी व वार्ड तक फुल हो गए हैं। फतेहगढ़ निवासी हरिओम वर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी सोनी वर्मा और बेटा धर्म 23 अगस्त से भर्ती हैं। पत्नी में डेंगू और बेटे में टायफायड की पुष्टि हुई है। वहीं देवाशरीफ निवासी अनुपम शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी आरोही तीन दिन से बुखार से पीड़ित है। देवा सीएचसी की जांच में डेंगू पॉजिटिव रिपोर्ट आई है। अब जिला अस्पताल की रिपोर्ट का इंतजार है। बुधवार को ओपीडी में आए मरीजों में से तीन मरीज टायफायड से पीड़ित भी मिले। भीड़ के कारण दोपहर एक से दो बजे तक ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों को जांच कराने में काफी परेशानी हुई। अस्पताल में 12 बजे के बाद जांच के लिए सैंपल नहीं लिया जाता है। जीतनगर के निवासी बादल तिवारी ने बताया कि अब जांच कराने फिर आना पड़ेगा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा ने बताया कि मौसम बदलने से वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है। इससे बचने के लिए घर और आसपास गंदगी या जलभराव न होने दें। ठंडे पानी के सेवन से भी बचे।