बाराबंकी। आस्था, परंपरा और उल्लास के बीच नदी के घाट व तालाबों पर बृहस्पतिवार दोपहर बाद से ही छठ की छटा छा गई। छठ मइया के गीतों की धुन पर घाटों पर जुटते परिवार, लाल-पीली साड़ी में सोलह शृंगार, नाक से मांग तक भरे सिंदूर, घुटने तक पानी में अर्घ्य देती महिलाएं...। पूर्वांचल व मिथिलांचल से दूर रहकर भी संस्कृति और परंपरा का ऐसा नजारा घाटों व तालाबों पर दिखाई दिया।
रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट समेत कई घाटों व तालाबाें पर दीपों व गन्ने के ढेरियों से सुशोभित वेदियां, छठ मइया के गूंजते गीत के बीच घुटने भर पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती महिलाओं ने अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
व्रती महिलाओं ने पूजन के दौरान दीप जलाकर सुशोभिता की पूजा-अर्चना कर पांच बार परिक्रमा की और पानी में उतर कर दीपकों को प्रवाहित किया। छठ माई के गीतों के बीच माथे पर सिंदूर का लंबा तिलक लगाया और आंचल फैलाकर सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा होने के बाद पूरा परिसर आतिशबाजी से रोशन हो गया।
पूजा स्थलों पर रहा उत्सव सा माहौल
रेठ नदी के चिलहटा घाट पर जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत पहुंचीं और पूजा में शामिल हुईं। शहर में नागेश्वरनाथ तालाब रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा रहा था। तालाब में चल रहा फव्वारा आकर्षण का केेेंद्र रहा। छठ पूजा के दौरान डीएम सत्येंद्र कुमार, एएसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा, महिला थानाध्यक्ष मुन्नी सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष शीला सिंह व सुरेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।
सेल्फी, वीडियो काॅल और फोटो खींचने की रही होड़
पूजा के साथ सेल्फी लेने की होड़ भी रही। वहीं घर से दूर रहने वालों को परिवार वाले वीडियो कॉल कर पूजन में शामिल कराते दिखे। इसके अलावा जिसे जहां मौका मिल जाता, लोग फोटो खिंचवाने को एक-दूसरे के हाथ में मोबाइल पकड़ा देते।
दोपहर दो बजे से ही जुुटने लगे थे लोग
पूजन स्थलों पर दोपहर दो बजे से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। हालांकि सूर्य अस्त होने में काफी समय बचा था लेकिन भीड़ के चलते साढ़े चार बजे ही महिलाएं हाथों में नारियल, धूप, दीप डाला लिए घुटने तक पानी में उतर चुकी थीं। इसके बाद लाली लिए सूर्य जैसे-जैसे अस्त होने लगा महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी।