बाराबंकी। किसानों को यूरिया के लिए भटकना पड़ रहा है। समितियों पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध होने के दावे किए जा रहे हैं मगर घंटों लाइन में लगने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। खाद वितरण मशीन में तकनीकी समस्या बताकर समितियों के सचिव से लेकर उच्चाधिकारी तक पल्ला झाड़ रहे हैं जबकि धान रोपाई कर चुके किसानों को ड्रेसिंग के लिए यूरिया की तत्काल आवश्यकता है।
बृहस्पतिवार को हैदरगढ़ ब्लॉक की कई साधन सहकारी समितियों पर खाद के लिए किसानों को परेशान होते देखा गया। रीठी भियामऊ समिति पर मानपुर के किसान नागेंद्र सिंह ने बताया कि वे एक सप्ताह से रोज खाद लेने आते हैं लेकिन सुबह कुछ किसानों को खाद देकर मशीन बंद होने का बहाना बनाकर समिति पर ताला लगा दिया जाता है।
शिवकुमार यादव ने बताया कि उन्हें मात्र एक बोरी खाद ही मिली है। मेवालाल यादव और रोहित रावत सहित कई किसान खाद के लिए परेशान दिखे। लिल्हौरा, चौबीसी और सुबेहा समितियों पर भी यूरिया होने के बावजूद किसानों को नहीं मिली। त्रिवेदीगंज की लक्ष्मणपुर समिति पर तीन दिन से किसानों को यूरिया खाद नहीं मिली है।
रौनी के विष्णुदत्त मिश्रा, नित्यानंद और अमित कुमार ने बताया कि सुबह आठ से पहले और देर शाम को चोरी-छिपे खाद दी जाती है। पोखरा के निकट मवैया मझगवां समिति पर 1039 बोरी यूरिया खाद मौजूद है लेकिन ई-पॉश मशीन नहीं चलने के कारण खाद का वितरण नहीं हुआ। इससे 40 से अधिक किसान निराश होकर वापस लौट गए।
सिद्धौर में छूलापाही समिति पर पूरे सागर गांव के शिवकुमार को चार दिन लाइन में लगने के बाद मात्र एक बोरी यूरिया मिली। उन्होंने बताया कि छह बीघा धान के लिए कम से कम आठ बोरी यूरिया चाहिए। छूलापाही समिति पर 500 बोरी यूरिया में से केवल 70 बोरी का वितरण हो सका है।
समितियों पर यूरिया मांग के मुताबिक पहुंच रही है लेकिन ई-पॉश मशीनों के संचालन में कुछ तकनीकी समस्या है, जिसे दूर करने के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा।
- राजित राम, जिला कृषि अधिकारी, बाराबंकी