फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Barabanki News: बेमाैसम बूंदाबांदी से अन्नदाता परेशान

Mon, 16 Mar 2026 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
विज्ञापन
विज्ञापन
बाराबंकी। बाराबंकी में मौसम के अचानक बदले रुख ने खेती-किसानी के गणित को बिगाड़ कर रख दिया है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से हो रही बूंदाबांदी ने न केवल तैयार खड़ी फसलों पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं, बल्कि खेतों में पड़े आलू के सड़ने का डर भी पैदा कर दिया है। किसान अब अपनी साल भर की पूंजी को बचाने के लिए कुदरत के आगे बेबस नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन

कोटवाधाम, आरियामऊ और इटोरा जैसे ग्रामीण अंचलों में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। किसानों ने सरसों की फसल काटकर खेतों में सुखाने के लिए रखी थी। रविवार को हुई अचानक बूंदाबांदी और तेज हवाओं ने इन कटी हुई फसलों को भिगो दिया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कटी हुई सरसों अधिक समय तक गीली रहती है, तो उसके दानों में कालापन आ जाता है और तेल की मात्रा कम हो जाती है, जिससे बाजार में किसानों को सही दाम नहीं मिल पाता।
सबसे बुरा हाल आलू उत्पादक किसानों का है। जनपद में लगभग 90 प्रतिशत आलू की खोदाई पूरी हो चुकी है। संसाधनों के अभाव और कोल्ड स्टोरेज में जगह की कमी के कारण अधिकांश किसानों का आलू अभी भी खेतों में ही खुले आसमान के नीचे पड़ा है। अचानक हुई बारिश से आलू के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसान रामू वर्मा (अमनियापुर) का कहना है, कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदा था, अब जब फसल घर ले जाने का वक्त आया, तो कुदरत ने सब बिगाड़ दिया। अगर तेज बारिश हुई तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन

गेहूं की फसल को दोहरी मार

मैदानी इलाकों में गेहूं की फसल भी अब पकने की कगार पर है। तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश से गेहूं की फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गिरे हुए गेहूं की बाली में दाना पतला रह जाता है और कटाई में भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है। आसमान में छाई धुंध और बढ़ी हुई नमी के कारण कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें