घाघरा में तेजी से हो रही कटान से एल्गिन-चरसड़ी बांध के कटने का कातरा मंडराने लगा है। नदी का पानी तटबंध को 40 मीटर के दायरे में काट रहा है यही वजह है कि करीब 19 मीटर बांध नदी में पूरी तरह से समा गया है। यदि कटान और तेज होती है तो जो एक मीटर बांध शेष बचा है वह भी बह जाएगा।
बांध बहने के बाद फिर रिंग बांध को रोक पाना बाढ़ खंड के लिए काफी मुश्किल होगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चन्द्रा, सचिव सिंचाई और दोनों जिलों के जिलाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने प्रमुख सचिव को बताया कि तटबंध की कटान देख जितने भी बाढ़ खंड के अधिकारी मौजूद थे वह भाग गए।
जिस पर प्रमुख सचिव ने बाढ़ खंड के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि बांध कटा तो किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं डीएम ने उन गांवों को खाली कराने के आदेश दिए हैं जो पानी की चपेट में आ सकते हैं। इस आदेश के बाद लोगों ने गांवों से पलायन शुरू कर दिया है।
टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार गोंडा के नकहरा गांव के पास रविवार को घाघरा पर बना एल्गिन चरसड़ी तटबंध किलो मीटर संख्या 10.520 से किलो मीटर संख्या 10.560 तक कुल 40 मीटर के क्षेत्रफल में नदी का पानी कटान कर रहा है। बांध की चौड़ाई 20 मीटर है जबकि दोपहर तक 19 मीटर बांध नदी में समा चुका था।
दोपहर में कटान बंद होने पर मरम्मत का कार्य और तेज कर दिया गया है। बांध पर मंडराए खतरे की जानकारी मिलते ही प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चन्द्रा, सचिव सिंचाई के साथ मौके पर पहुंच गए। उधर जिलाधिकारी अजय यादव, जिलाधिकारी गोंडा आशुतोष निरंजन के साथ पहले ही बंधे पर डटे हुए थे।
इससे पहले एडीएम हरिकेश चौरसिया और एएसपी दक्षिणी के साथ कैंप कर रहे थे। मौके का जायजा लेने पहुंचे प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चन्द्रा को ग्रामीणों ने बताया कि बांध पर जैसे ही कटान शुरू हुई बाढ़ खंड के अधिकारी भाग खडे़ हुए।
जिस पर प्रमुख सचिव काफी नाराज हुए और मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि समय रहते जो कार्य बताए गए थे वह पूरे कर लिए गए होते तो आज यह हालात न होते। प्रमुख सचिव ने दो टूक कहा कि यदि बांध कटा तो संबंधित अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। बांध नहीं कटना चाहिए पैसे और संसाधनों की कोई कमी आडे़ नहीं आने दी जाएगी।
बांध कटा तो ये गांव होंगे प्रभावित
यदि बांध कटता है तो जिले के मांझारायपुर, परसावल, कमियार, बांसगांव और असुआ पूरी तरह से प्रभावित हो जाएंगे। इसके अलावा गोंडा जिले के करीब 19 गांव इसकी चपेट में आ जाएंगे। इसलिए इन गांवों में बसे लोगों को गांव खाली करने का आदेश देते हुए प्रभावित क्षेत्र में एलर्ट घोषित कर दिया गया है।
एडीएम ने बताया कि नदी का पानी जिस जगह पर बांध को काट रहा है इसके ठीक सामने नाऊपुरवा गांव आता है। यहां के 182 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
बाढ़ खंड के अधिकारियों की लापरवाही पर प्रमुख सचिव सिंचाई ने नाराजगी जताई है। साथ ही चेतावनी देते हुए बांध को कटने से बचाने के सख्त निर्देश दिए हैं। वैसे दोपहर के बाद से कटान रूक गई और मरम्मत का कार्य तेज करा दिया गया है।
लेकिन यदि नदी का पानी फिर से कटान करता है तो बांध कटने से रोक पाना संभव नहीं है। प्रभावित क्षेत्र में एलर्ट घोषित कर दिया गया है दो कंपनी फ्लड पीएसी तैनात कर दी गई है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्र के एसडीएम और राजस्व विभाग के अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहने के आदेश दिए गए हैं। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी