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तपोस्थली कोटवाधाम व धन्नाग मेले में दूसरे दिन भी उमड़े श्रद्धालु

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कोटवाधाम (बाराबंकी)। कार्तिक पूर्णिमा से शुरू हुए मेले में दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। संत शिरोमणि समर्थ जगजीवन साहब की तपोस्थली कोटवाधाम परिसर बाबा के जयकारे से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर माथा टेका।
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पशु बाजार में काफी रौनक रही। हरदोई से आया सर्कस व झूला आकर्षण का केंद्र बना है। गोंडा, बलरामपुर, रायबरेली, हरदोई, अयोध्या, लखीमपुर व उन्नाव आदि जिले से आए सतनामी भक्तों ने बुधवार को बाबा की समाधि पर माथा टेककर आशीष मांगा।
मेला परिसर के करीब लगे पशु बाजार में अच्छी नस्ल की गाय व भैंस मौजूद हैं। किंतूर से मोहम्मद आमीन मुर्रा नस्ल की भैंस लाए हैं जिसकी कीमत 75 हजार है। सोनू पंडित शिवगढ़ रायबरेली से 92 हजार की कीमत की भैंस मेले में बिक्री के लिए लाए हैं।
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मुजफ्फर नगर से इमरान चौधरी एक लाख दस हजार कीमत की गीर नस्ल की गाय मेले में लाए हैं। बागपत जिले से आए व्यापारी इरफान कई नस्ल की गाय इस बार मेले में लाए है जिसमें सिंधी, साहीवाल, जसीर व गीर नस्ल की गाय शामिल हैं। पशु बाजार में पशुपालकों की आमद बनी रही। खरीदार दिन भर खरीद फरोख्त में जुटे रहे।
धन्नाग तीर्थ पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले मेले के दूसरे दिन बुधवार को भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मेला समिति के आयोजक राम लखन शुक्ला ने बताया कि यह मेला पंद्रह दिन तक चलता है।
मेले में आए लोगों ने खूब खरीदारी की। इस मेले में आसपास ही नहीं बल्कि लखनऊ, बहराइच, हरदोई, सीतापुर व लखीमपुर आदि जनपदों के लोगों की गहरी आस्था है। दूरदराज जनपदों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
मेले में पहुंचे रहे श्रद्धालु व मेलार्थियों को रैनबसेरा, शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं न होने से समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं के लिए बने रैन बसेरे का ज्यादातर हिस्सा देखरेख के अभाव के चलते जर्जर हो गया है। इसके कमरों की न तो रंगाई-पोताई कराई गई है और न सफाई ही कराई गई। इससे दूरदराज से आए श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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