बाराबंकी। पांच दिन बाद भी जिला अस्पताल में बिजली संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसके चलते बाधित होने वाली बिजली आपूर्ति के कारण मरीजों के साथ ही कार्यरत स्टॉफ को भी भीषण गर्मी में काम काज करने में परेशानी उठाना पड़ रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत अस्पताल की लैब में होने वाली विभिन्न जांचों के बाधित होने के कारण मरीजों को हो रही है।
बीती चार मई को अस्पताल परिसर स्थित ट्रांसफार्मर में आग लग गई थी। इससे बाधित हुई बिजली आपूर्ति की व्यवस्था अभी तक पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ सकी है। अस्पताल प्रशासन अभी तक बिजली आपूर्ति को स्थाई रूप से बहाल नहीं करा सका है। इसके चलते शुक्रवार को पूरे दिन बिजली की आंख-मिचौली के कारण मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हर आधे घंटे में बिजली गुल हो जाने के कारण ओपीडी और अन्य विभागों का कामकाज बाधित होता रहा। बिजली न होने से कंप्यूटर सिस्टम के भी काम न करने के कारण काउंटर पर हाथ से परचा बनाने का काम करना पड़ा। इससे भीषण गर्मी में पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगे मरीजों व तीमारदारों को घंटों पसीना बहाना पड़ा। दवा वितरण कक्ष में भी बिजली बार-बार जाने से अंधेरा बना रहा, जिससे मरीजों को दवाएं देने में दिक्कतें आईं। दवा लेने के लिए मरीजों की लंबी कतार सुबह से लेकर दोपहर बाद तक काउंटर के बाहर लगी रहीं।
गर्मी के बीच बिजली गुल हो जाने से इलाज के इंतजार में ओपीडी में बैठे मरीजों के साथ ही चिकित्सकीय स्टॉफ को भी पसीने से तरबतर होकर परेशानी झेलना पड़ी। सबसे ज्यादा दिक्कत एक्सरे व अल्ट्रासाउंड के साथ खून से जुड़ी जांच कराने में हुई। अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों के तीमारदार भी हाथ के पंखे से हवा कर मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने की कोशिश में जुटे नजर आए।
सीएमएस डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर जलने के कारण क्षतिग्रस्त हुए पैनल को दुरुस्त बनाने का काम चल रहा है, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जल्द ही स्थिति को सामान्य बाने का प्रयास किया जा रहा है।