बाराबंकी। सरकारी स्कूल का नाम आते ही लोगों के जेहन में जीर्ण-शीर्ण बिल्डिंग.. बदहाल शिक्षा व्यवस्था.. जैसी तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन अगर शिक्षक ठान लें तो छात्रों के भविष्य निर्माण के साथ-साथ स्कूल की भी सूरत बदल सकती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है रामनगर तहसील के जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक संत कुमार त्रिपाठी ने..। इनकी एक पहल से बच्चों को अब सामान्य शिक्षा के साथ हाईटेक शिक्षा से भी जोड़ा गया है। यहां अध्ययनरत बच्चे आधुनिकता से कदमताल कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक के आग्रह पर एक निजी संस्था ने बच्चों को पढ़ाई के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए हैं। यह टैबलेट बच्चों के लिए ज्ञान का खजाना साबित होंगे। सूरतगंज ब्लाक के जूनियर हाई स्कूल बनर्की में कुल 305 बच्चे पंजीकृत हैं। यह स्कूल बच्चों के नामांकन के मामले में दशकों से अपनी अलग पहचान बना रखी है। एक एनजीओ ने पढ़ाई के लिए स्कूल को 40 टैबलेट उपलब्ध कराए। प्रधानाध्यापक ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूल को वाई-फाई से जोड़ा है। अनुदेशक सविता मिश्रा टैबलेट के माध्यम से छात्र-छात्राओं को पढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि डिजिटल इंडिया के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जरूरी है कि प्रारंभिक शिक्षा में बच्चे टैबलेट, इंटरनेट के उपयोग, क्षमता से परिचित हों। इसके लिए विषय के अनुसार सॉफ्टवेयर डाउनलोड कराए गए हैं। इससे छात्रों को ऑडियो ,वीडियो, चित्र, ज्ञानवर्धक खेलों के माध्यम से अंग्रेजी,गणित, विज्ञान विषय को ऐनीमेशन के माध्यम से सीखना नया अनुभव मिलता है। यही नहीं सभी विषय हिंदी, अंग्रेजी ,विज्ञान, गणित,संगीत,कला आदि विषयों शब्दकोष का ज्ञान प्राप्त हो सकता है।
बच्चों के लिए बनवा दिया था लकड़ी का पुल
जूनियर हाई स्कूल बनर्की में तैनात प्रधानाध्यापक संतकुमार त्रिपाठी इससे पहले गोंडा के सेमरीकला के कंपोजिट विद्यालय में तैनात थे। उस दौरान बच्चों को नाले में उतर कर स्कूल जाना पड़ता था। करीब दस साल से यह बच्चे त्रासदी झेल रहे थे। बच्चों के दर्द को देखते हुए प्रधानाध्यापक में नाले पर लकड़ी का अस्थाई पुल बनवा कर मिसाल पेश की थी। इस पहल पर डीएम शशांक त्रिपाठी ने आधिकारिक हैंडल एक्स पर पोस्ट कर हौसला बढ़ाया था।