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डॉग स्क्वाएड की जांच में धरा गया संदिग्ध

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बाराबंकी। जिस युवती की हत्या करने के बाद उसके शव के छह टुकड़े कर उसे ब्रीफकेस व कैरीबैग में भरकर फेंका गया था पुलिस अभी तक उसके बारे में जानकारी नहीं जुटा सकी है।
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युवती की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। जबकि डॉग स्क्वाएड की जांच के चलते संदिग्ध मिले एक युवक को पुलिस ने पूछताछ के लिए पकड़ा है। इसके साथ ही लखनऊ व आसपास के जिलों की पुलिस से भी संपर्क कर पुलिस इस मामले का खुलासा करने का प्रयास कर रही है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के सफेदाबाद में युवती के मर्डर केस में बुधवार सुबह फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाएड घटनास्थल की जांच करने पहुंचा। फोरेंसिक टीम ने जहां दोबारा साक्ष्य इकट्ठा किये तो वहीं खोजी कुत्ते को बैग से बरामद कपड़े सुंघाए गए। इस पर वह स्टेट बैंक की शाखा की तरफ दौड़ पड़ा।
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डॉग बैंक की सीढ़ियों से होता हुआ बैंक के ऊपर बने हॉस्टल के एक कमरे के बाहर जा बैठा। जिस कमरे के बाहर वह बैठा उस कमरे में ताला बंद था। पुलिस ने हॉस्टल के मालिक को बुलवाकर उस व्यक्ति को बुलवाया जो इस कमरे में रहता था। बताया जाता है कि इस कमरे में एक व्यक्ति तीन वर्ष से रह रहा था। जो कि प्रापर्टी डीलिंग का काम करता है।
स्थानीय लोग उसका नाम सौरभ बता रहे हैं। पुलिस ने डॉग की निशानदेही पर सौरभ के कमरे को खुलवाया और तलाशी ली। इसके साथ ही पूरे हॉस्टल को खंगाला। हालांकि पुलिस को वहां से कोई खास सुराग नहीं लगा। इसके बाद पुलिस हॉस्टल के मालिक थाना सतरिख अंतर्गत बहादुरपुर गांव निवासी प्रदीप यादव और संदिग्ध व्यक्ति को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। पुलिस अभी इस मामले में कोई जानकारी देने से इंकार कर रही है।
शहर इलाके के सफेदाबाद जैसे व्यस्त चौराहे पर पुलिस बूथ से मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पर मंगलवार शाम ब्रीफकेस और बैग में मिला युवती की टुकड़ों में लाश ने क्षेत्रीय पुलिस की गश्त की पोल खोलकर रख दी। अभी पुलिस सफेदाबाद कस्बे में हुई एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत का खुलासा कर नहीं पाई थी कि इस बड़ी वारदात ने स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
पुलिस लगातार गश्त करती रही और हत्यारे युवती की लाश के टुकड़े कर सफेदाबाद चौराहे के पास झाड़ियों शव को ब्रीफकेस और कैरी बैग में भरकर फेंक गये। पुलिस ने खुद स्वीकारा की लाश कई दिन पुरानी है। अब प्रश्न ये उठता है कि यदि लाश कई दिन पुरानी है तो पुलिस की नजर इन लावारिस बैग और ब्रीफकेस पर क्यों नहीं पड़ी? या पुलिस जानबूझकर अनजान बनी रही। जिस जगह घटना घटित हुई, वहां से स्टेट बैंक की शाखा कुछ कदमों की दूरी पर है।
जहां पुलिस और जनता का आना-जाना दिनभर लगा रहता है। उसी शाखा में पुलिस की ड्यूटी भी रहती है। मगर पुलिस की पैनी नजर इस जघन्य अपराध को भांप तक न सकी। मौके पर लाश दो हिस्सों में मिली। ब्रीफकेस में युवती का धड़ नग्न अवस्था में था। जबकि उससे कुछ मीटर की दूरी पर एक पेड़ के नीचे पड़े बैग में दोनों हाथ व दोनों पैर और दूसरी पॉलीथिन में उसका सिर मिला था।
ब्रीफकेस में धड़ के साथ तीन जोड़ी सलवार-कुर्ता और कुछ कपड़े भी थे। जिन्हें खुलवाकर एसपी ने मीडिया को दिखाया। ऐसा प्रतीत होता है कि मृतका घर से कपड़े और रुपये आदि लेकर अपने किसी परिचित के साथ भागी हुई हो। आशंका है कि दुष्कर्म के बाद उससे रुपये आदि छीनकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया हो।
ठीक एक महीने पहले छह जून को सफेदाबाद कस्बे में विवेक शुक्ल, उसकी पत्नी अनामिका और तीन बच्चों की हत्या का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि छह टुकड़ों में बैग और ब्रीफकेस में युवती की लाश मिलने से क्षेत्र में दशहत फैल गई। पांच लोगों की हत्या का राज तो पुलिस की फाइलों में दबकर रह गया। क्या अब पुलिस इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझा पाएगी? यही सवाल लोगों के दिमाग में कौंध रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली से सफेदाबाद क्षेत्र अपराधों का केंद्र बनता जा रहा है। स्थानीय पुलिस जहां दिन-रात चालान करने और रात्रि वसूली में व्यस्त रहती है। वहीं अपराधी इसका फायदा उठाकर अपने मंसूबों में कामयाब होकर फरार हो जाते हैं।
एएसपी आरएस गौतम का कहना है कि मृत युवती की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। डॉग स्क्वाएड की जांच में जो भी संदिग्ध मिल रहे हैं, उनसे पूछताछ की जा रही है। अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर जांच जारी है। उम्मीद है कि जल्द ही इस हत्याकांड का खुलासा होगा।
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