स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के सरकार के दावे का सीएचसी हैदरगढ़ में ही मखौल उड़ाया जा रहा है। रविवार को आकस्मिक सेवा में मरीजों को इलाज मिलना तो दूर थानों से भेजे गए मारपीट में घायल मरीजों का मेडिकोलीगल कई घंटे तक नहीं हो सका। चिकित्सकों की लापरवाही से आक्रोशित भाकियू ने मुख्य गेट का ताला बंद कर विरोध प्रदर्शन कर केंद्र अधीक्षक को तत्काल हटाए जाने की मांग की है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैदरगढ़ पर एक भी चिकित्सक नहीं होने से रविवार को मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। शनिवार की रात को सालपुर गांव में मकान की छत पर सोते समय बदमाश के चाकू के हमले से घायल प्रियंका (13) पुत्री हरीशचंद्र को सीएचसी लाया गया था।
सुबह पुलिस के शिकायत दर्ज करने के बाद कई घंटे तक इंतजार के बाद भी उसका मेडिकोलीगल नहीं हो सका। साथ आए गांव के रामकैलाश द्वारा लखनऊ में बैठे अधीक्षक से संपर्क करने पर उन्होंने घायल को मेडिकोलीगल के लिए सीएचसी त्रिवेदीगंज में कराने की बात कही।
सुबेहा के बरगदहा गांव से मारपीट में घायल बाबू व परवेज को लेकर थाना पुलिस दोपहर एक बजे सीएचसी पर पहुंचे। इलाज नहीं मिलने पर घंटो तक थाने के दो होमगार्ड घायल मरीजों को लेकर भटकते रहे।
मरीजों को इलाज नहीं मिलने पर आक्र्रोशित भाकियू ने दोपहर में चिकित्सालय के भवन में ताला बंद कर केंद्र अधीक्षक को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मामले की जानकारी होने पर अधिकारियों की फटकार के बाद आकस्मिक सेवा में तैनात केंद्र अधीक्षक शाम को साढ़े तीन बजे सीएचसी पर पहुंचे।
उन्होंने भाकियू नेताओं से वार्ता कर उनको मनाने का प्रयास किया लेकिन भाकियू कार्यकर्ता व किसान अपनी मांग पर अड़े हैं। भाकियू के कुवंर बहादुर सिंह, महादेव यादव, फूलचंद्र यादव, हरीश्चंद्र यादव आदि ने कहा किसी सक्षम अधिकारी से अधीक्षक को हटाने का आश्वासन मिलने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
केंद्र अधीक्षक नितिन प्रकाश मल्ल ने कहा आयुष चिकित्सक डॉ. सलमान केंद्र पर मौजूद रहे इलाज के लिए किसी को कठिनाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा मेडिकोलीगल के लिए मरीज को त्रिवेदीगंज भेजा गया था तथा बाद में केंद्र पर पहुंच कर अन्य मरीजों का मेडिकोलीगल किया गया है।
इमरजेंसी में थी प्रभारी की ड्यूटी
रविवार सुबह से शाम तक सीएचसी प्रभारी की ड्यूटी इमरजेंसी में लगी थी। ओपीडी बंद होने के कारण इनको सुबह ही केंद्र पर पहुंचना था। लेकिन वह ड्यूटी पर नहीं पहुंचे न ही किसी अन्य चिकित्सक की ड्यूटी लगाई।
दो घंटे की ड्यूटी करती है महिला चिकित्सक
कस्बे में तीस बेड के चिकित्सालय को प्रथम संदर्भन इकाई का दर्जा देकर कई चिकित्सीय सुविधाओं से संतृप्त किए जाने के बाद भी महिलाओं को प्रसव के लिए जिले से लेकर लखनऊ तक भटकना पड़ता है।
महिला चिकित्सक समेत दस से अधिक चिकित्सक केंद्र पर तैनात हैं लेकिन राजधानी में रहने का सुख नहीं छोड़ पाने के कारण मरीजों को सुविधांए नहीं मिल रही हैं। कार्य दिवस के दिन भी सीएचसी पर तैनात महिला चिकित्सक सिर्फ दो या तीन घंटे की ड्यूटी करती हैं।