जिला अस्पताल प्रशासन की मनमानी व बदइंतजामी का आलम ये है कि ट्रॉमा सेंटर में बीते मंगलवार शाम सड़क हादसे में घायल होकर आए मरीज फर्श, बेंच व स्ट्रेचर पर तड़पकर मर गए। ऐसे हालात से रोज ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीजों को रोजाना जूझना पड़ रहा है। अस्पताल में दवाओं का टोटा, स्टाफ की कमी और डॉक्टरों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन की बदइंतजामी व मनमानी के चलते छह वरिष्ठ चिकित्सक अस्पताल छोड़कर चले गए। सफदरगंज हाईवे हादसे के बाद जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी ने बदइंतजामी देख सीएमएस डॉ. एसके सिंहको फटकार लगाते हुए सुधार के निर्देश तो दिए पर दूसरे दिन भी कोई बदलाव अस्पताल में नहीं दिखा।
जिला अस्पताल में बने ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की जान से रोज खिलवाड़ होता है। यहां पर भारी संख्या में घायलों के लिए अस्पताल द्वारा बेड, डॉक्टर व अन्य स्टाफ तो दूर दवाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जातीं। तीमारदार अगर इसका विरोध करते हैं तो मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। अधिकांश मरीज लखनऊ तक पहुंच भी नहीं पाते और रास्ते में दम तोड़ देते हैं। करोड़ों की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर में पड़े बेड धूल फांक रहे हैं और मरीज फर्श व बेंच पर तड़पते रहते हैं।
मौके पर मौजूद रहने वाले ईएमओ मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें रेफर कर पिंड छुड़ाते हैं। दोपहर दो बजे तक इमरजेंसी में 211 मरीज आए जिसमें से 31 को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया और 52 भर्ती हुए बाकी दवाएं लेकर घर चले गए। वहीं शहर के कृष्णा कॉलोनी निवासी अनू यादव पुत्री उदित नरायन कसो श्वांस की दिक्कत बढ़ने पर भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज संभव न होने की बात कहते हुए उसे केजीएसी रेफर कर दिया गया।