बाराबंकी। सरयू नदी की कटान से गांवों और बांध को बचाने के लिए दुर्गापुर के पास करीब सात करोड़ रुपये की लागत से स्पर का निर्माण कराया जाएगा। बाढ़ खंड ने इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा दिया था जिसकी जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस स्पर के बनने से न केवल बांध को बचाया जा सकेगा बल्कि इसके आसपास करीब तीन दर्जन गांवों को भी बाढ़ से बचाया जा सकेगा।
सरयू नदी का जलस्तर इस वर्ष भी कई बार खतरे के निशान को पार कर गया था और नदी का पानी रामनगर क्षेत्र में कोरियनपुरवा और तपेसिपाह तक पहुंच तेजी से कटान करने लगा था। इससे तराई के करीब तीन दर्जन गांवों के लोगों में हड़कंप मच गया था और यहां पर बने बांध पर भी कटान का खतरा मंडराने लगा था।
तराई के लोगों की सूचना पर तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ने कटान रोकने के सख्त आदेश दिए था। एडीएम के आदेश पर बाढ़ खंड की टीम ने मौके पर पहुंच मोर्चा संभाल लिया था और कटान से बांध को बचाने के साथ ही गांवों को भी बचाने का कार्य शुरू कर दिया था।
बाढ़ खंड टीम ने कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद कटान पर काबू पाया था और साथ ही बंधे को भी बचा लिया गया था। तब जाकर अधिकारियों के साथ ही यहां के लोगों ने भी राहत की सांस ली थी।
भविष्य में इस तरह की कोई समस्या न उत्पन्न हो इसे देखते हुए बाढ़ खंड विभाग ने दुर्गापुर के पास करीब सात करोड़ रुपये की लागत से स्पर बनाए जाने का प्रस्ताव बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया था। विभाग की उम्मीद है इसी वित्तीय वर्ष में इसके निर्माण की स्वीकृति के साथ ही पैसा भी मिल जाएगा इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
दुर्गापुर के पास स्पर बन जाने से यहां पर बने बांध में बचाने के साथ ही कोरियनपुरवा और तपेसिपाह को कटान से बचाया जा सकेगा। इसके अलावा मल्लाहनपुरवा, दुर्गापुर, मड़ना, लहडरा, हरिनरायनपुर, लोहटी जेई, लोहटी पसई, मीतपुर, खोजहानपुर, मथुरा का पुरवा समेत करीब तीन दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को बाढ़ की विभीषिका से बचाया जा सकेगा।
दुर्गापुर के पास करीब सात करोड़ रुपये की लागत से स्पर का निर्माण कराया जाना है। इस स्पर के बन जाने से सरयू नदी की बाढ़ से यहां पर बने बांध को बचाया जा सकेगा वहीं करीब तीन दर्जन गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। उम्मीद है कि इसी वित्तीय वर्ष में इसकी स्वीकृति भी मिल जाएगी।
-शशिकांत सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़