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यौन उत्पीड़न की शिकार को अस्पताल से भगाया

Sun, 21 Aug 2016 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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फोटो-8 से 14 तक  
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हेडिंग ... यौन उत्पीड़न पीड़िता को अस्पताल से भगाया
सबहेड ... आक्रोशित ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर किया प्रदर्शन   

मंदबुद्धि किशोरी से रेप में असफल होने के बाद पिटाई से घायल पीड़िता को जिला महिला अस्पताल में उपचार के तीन दिन बाद भगा दिया गया है। आरोप है कि अभी पीड़िता की हालत में सुधार हुआ भी नहीं था कि जिला महिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने उसे जबरन बाहर निकाल दिया। जिससे आक्रोशित परिवारीजनों ने रविवार को हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। मामला बिगड़ता देख अस्पताल प्रशासन ने पीड़िता को दोबारा भर्ती कर ग्रामीणों को शांत कराया।

उसके बाद पीड़िता को फिर ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया, लेकिन परिवारीजनों ने ट्रॉमा ले जाने से साफ मना कर दिया। अस्पताल प्रशासन के रवैए से क्षुब्ध परिवारीजनों ने ऑडिटोरियम पहुंच पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मामले की शिकायत की जिस पर उन्होंने राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया से मदद करने को कहा। 
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सतरिख थाना क्षेत्र की एक सोलह वर्षीय मंदबुद्धि किशोरी के साथ तीन दिन पूर्व रेप का प्रयास हुआ था। असफल होने पर आरोपी ने उसकी जमकर पिटाई की थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें पकड़ा था।

वहीं पीड़िता को इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीड़िता के परिवारीजनों का आरोप है कि महिला अस्पताल के चिकित्सकाें द्वारा उपचार में लापरवाही बरती जा रही है। इसकी शिकायत सीएमएस डॉ. आभा आशुतोष से की गई तो उन्होंने भी कहा कि न तो इसका बलात्कार हुआ और न ही इसकी हालत खराब है इसे घर ले जाओ।

पीड़िता के पिता का कहना है कि पीड़िता के गले में सूजन होने के कारण वह न तो खाना खा सकती है और न ही पानी पी सकती है। चलने-फिरने में भी असमर्थ है। जबकि डॉक्टर उपचार करने के बजाए उसे घर ले जाने का दबाव बना रहे हैं। घर न ले जाने पर रविवार को पीड़िता को अस्पताल से बाहर कर दिया और कहा कि इसका इलाज हो चुका है घर ले जाओ।

इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणोें ने हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जिसके बाद पहुंचे डॉक्टरों व पुलिस ने ग्रामीणों को शांत कराया। पीड़िता को दोबारा महिला अस्पताल में भर्ती करने के बाद लोग शांत हुए। इस दौरान अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल रहा।

पीड़िता ठीक थी तो ट्रॉमा रेफर क्यों किया?
पीड़िता के परिवारीजनों के हंगामा काटने के बाद जिला महिला अस्पताल के कर्मचारियों ने पीड़िता को दोबारा भर्ती कर लिया। पहले चिकित्सक उसकी हालत ठीक होने की बात कह रहे थे फिर उसे ट्रॉमा सेंटर भेजने की क्या आवश्यकता पड़ गई। पीड़िता के भाई का आरोप है कि सीएमएस डॉ. आभा आशुतोष से ट्रॉमा सेंटर रेफर करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका मेडिकोलीगल कराने आए थे, वह काम तो हो गया।

तुम लोग नहीं मान रहे हो इसलिए इसे ट्रॉमा सेंटर भेजा जा रहा है। परिवारीजन उसे ट्रॉमा सेंटर न ले जाने की बात पर अड़े रहे। हालांकि इस मामले में सीएमएस का कहना है कि पीड़िता भर्ती है उसे बाहर नहीं निकाला गया था। परिवार वाले उसे खुद बाहर ले गए और अस्पताल को बदनाम करने के लिए बवाल किया।
 
शीला दीक्षित से परिवारीजनों ने की मुलाकात
पीड़िता को अस्पताल से भगाने के बाद आक्रोशित परिवारीजनों व ग्रामीणों ने ऑडीटोरियम में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आई दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व सांसद पीएल पुनिया से मिलकर मामले की शिकायत की है। इस पर सांसद पुनिया व शीला दीक्षित ने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराए जाने का आश्वासन दिया है। 
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पीड़िता को जबरन अस्पताल से निकाले जाने की सूचना मिली थी। मौके पर फाइलेरिया निरीक्षक केके गुप्ता को भेजा गया था। पीड़िता को दोबारा अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने के बाद शासन को रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ
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