बाजार पर छाने लगा होली का रंग
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बुराइयों को जलाने के पर्व होलिका दहन से पहले जनता का जनादेश का फैसला आ रहा है। इस फैसले में केसरिया, नीला और लाल रंग में किसका रंग चोखा होने वाला है। इस पर मुहर लग जाएगी। अंतिम समय तक मतदाताओं की चुप्पी के बीच केसरिया (भाजपा), नीला (बसपा), लाल (सपा) के बीच कांटे की टक्कर रही है।
यही कारण है कि मतदान के बीस दिन बाद आने वाले परिणाम पर कोई भी समीक्षक किसी को जिताने या हराने की पुख्ता भविष्यवाणी नहीं कर पा रहा है। पार्टी प्रत्याशियों की जहां धुकधुकी तेज हो रही है, वहीं सट्टा बाजार भी गरमा गया है।
तीसरे चरण में 19 फरवरी को जिले की छह सीटों पर हुए मतदान के बाद राजनीतिक पंडितों से लेकर आम आदमी तक जिले की सभी सीटों पर जीत हार की जो समीक्षा कर रहा था, वह किसी नतीजे पर नही पहुंच पाया। इसके पीछे जिस तरह चुनाव में केसरिया, नीला और लाल झंडों के बीच मतदाताओं को अपने रंग में रंगने की कोशिश की गई।
उसमें कौन सा रंग अधिक चटख और चोखा होने वाला है। इसे लेकर अटकलें तेज तो हुई हैं। लेकिन, प्रत्याशियों से लेकर समर्थकों की धुकधुकी बढ़ी है। तो दलीलों के बीच सट्टे भी लगने लगे हैं। मतगणना की उलटी गिनती शुरू हो गई है।
जनादेश का रंग कुछ घंटे बाद ही दिखने लगेगा। पिछले 2012 के चुनाव परिणाम से पूरा जिला लाल रंग में ऐसा रंगा कि उस पर कोई दूसरा रंग चढ़ ही नहीं पाया। इसी का परिणाम रहा कि जिले को तीन लाल बत्ती भी नसीब हुई। अब 2014 में लाल रंग पर केसरिया रंग अधिक चटख हो गया। तो उस पर भी कोई दूसरा रंग नजदीक नहीं पहुंच पाया। इस बार होलिका दहन से ठीक एक दिन पहले जनादेश आ रहा है।
लेकिन न 2012 के लाल रंग जैसी हवा दिखी और न ही 2014 में केसरिया जैसी आंधी। इस बार अपने-अपने रंग में जनता को रंगने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर सीएम अखिलेश यादव, कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और बसपा मुखिया मायावती यहां पहुंचे। इन सबके बावजूद जनता ने चुपचाप किसका रंग चोखा किया है। इसके परिणाम का काउनडाउन शुरू हो गया है।