पीएचसी सुबेहा के कर्मचारियों की लापरवाही से एक तीन वर्षीय की जान चली गई। सरांय तकिया गांव निवासी मासूम को उल्टी दस्त होने पर उसके घर वाले तीन दिन पहले पीएचसी लाये थे लेकिन कोई डॉक्टर न मिलने से वार्डब्वाय ने बाहर की दवा लिख घर भेज दिया था।
गुरुवार को तबियत ज्यादा खराब होने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया जहां से लोहिया अस्पताल लखनऊ रेफर कर दिया गया था। शुक्रवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। उसके पिता का आरोप है कि अगर शुरू में उसे सही इलाज मिला होता तो उसकी जान बच जाती। उधर गांव के तीन परिवार के सात अन्य मरीजों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
सुबेहा के सरांय तकिया वार्ड निवासी नईम की तीन वर्षीय पुत्री मंतशा को उल्टी दस्त होने पर तीन दिन पहले सुबेहा पीएचसी लाया गया था। लेकिन वहां पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। एक वार्ड ब्वाय ने बाहर से दवा लिख घर भेज दिया था। तबियत ज्यादा खराब होने पर गुरुवार को उसे सीएचसी ले गए लेकिन वहां से इलाज न कर उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।
यहां से भी शाम को लखनऊ के लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया था जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उसकी मौत हो गई। नईम का कहना है कि अगर उसकी बेटी को सही इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती। मासूम की मौत की सूचना से गांव में हड़कंप मच गया।
उल्टी दस्त से पीड़ित अन्य मरीजों को भी सीएचसी लाया गया। यहां अफरीन बानो (18), नाजरीन (12) व अजरा (6) तथा रेशमा बानो व गुड़िया पुत्री सप्फून अली, सूबी (12) पुत्री तौहीक को इलाज के लिए भर्ती किया गया है। पीड़ितों ने बताया कि मोहल्ले में संक्रमण फैलने से कई अन्य परिवारों में लोग भी बीमार हैं। बीत एक सप्ताह में नौ बकरियों की भी मौत हो गई है।
पीएचसी व सीएचसी पर सूचना के बाद भी बीते एक सप्ताह में कोई स्वास्थ्यकर्मी मौके तक नहीं पहुंचा है। मरीजों का इलाज करने वाले सीएचसी के चिकित्सक डॉ. मनोज ने बताया कि मरीजों में फूड पॉयजनिंग होने की संभावना हो सकती है। उधर मृतक मासूम के परिवारीजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत सीएमओ से की है।